बसंत पंचमी आज, ऐसे करें मां सरस्वती की पूजा | जानें शुभ मुहूर्त और पढ़ें उनके जन्म की कहानी

आज यानी बुधवार एक फरवरी 2017 को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जा रहा है. यह त्योहार हर साल माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था. पढ़ें कैसे हुआ मां सरस्वती का जन्म…

पतझड़ के बाद बंसत ऋतु का आगमन होता है बंसत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है. स्वयं भगवान कृष्ण ने कहा है की ऋतुओं में मैं बसंत हूं.

मां सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त
सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त-इस वर्ष 01 फरवरी को बसंत पंचमी मनाई जाएगी. इस दिन पूजा का शुभ समय सुबह 7.50 बजे से 11.56 बजे तक है.

ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के प्रारंभ में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने मनुष्य की रचना की. लेकिन अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे. उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है, जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है.

विष्णु जी से सलाह लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का. पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ.

यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था, जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था. अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थीं.

ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया. जैसे ही देवी ने वीणा बजाना शुरू किया, पूरे संसार में एक मधुर ध्वनि फैल गई. संसार के जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई.

तब ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा. मां सरस्वती विद्या और बुद्धि प्रदान करती हैं. बसंत पंचमी के दिन इनकी उत्पत्ति हुई थी, इसलिए बसन्त पंचमी के दिन इनका जन्मदिन मनाया जाता है. मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा की जाती है और विद्या और बुद्धि का वरदान मांगा जाता है.

मां सरस्वती का संबंध बुद्धि से है, ज्ञान से है. यदि आपके बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता है, यदि आपके जीवन में निराशा का भाव बहुत बढ़ गया है, तो बंसत पंचमी के दिन मां सरस्वती का पूजन अवश्य करें. मां के आशीर्वाद से आपका ज्ञान बढ़ेगा और आप जीवन में सही निर्णय लेने में सफल होंगे.

मां सरस्वती की पूजा विधि-
देवी भागवत के अनुसार देवी सरस्वती की पूजा सर्वप्रथम भगवान श्री कृष्ण ने की थी.
प्रातःकाल समस्त दैनिक कार्यों से निवृत होकर स्नान, ध्यान करके मां सरस्वती की तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद कलश स्थापित कर गणेश जी तथा नवग्रहों की विधिवत पूजा करें. सरस्वती जी का पूजन करते समय सबसे पहले उनको स्नान कराएं. तत्पश्चात माता को सिन्दूर व अन्य श्रृंगार की वस्तुवें चढ़ाएं फिर फूल माला चढ़ाएं. मीठे का भोग लगाकर सरस्वती कवच का पाठ करें. देवी सरस्वती के इस मन्त्र का जाप करने से ‘श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा’ असीम पुण्य मिलता है.