‘बंटवारे’ में 16 साल बाद उत्तराखंड को मिला यूपी से अपना हिस्सा, फिर भी…

आखिरकार परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर उत्तराखंड का 16 साल लंबा इंतजार खत्म हो गया. उत्तर प्रदेश शासन ने यूपी के अधीन आने वाली परिसंपत्तियों को उत्तराखंड को हस्तांतरित करने का शासनादेश जारी कर दिया है. इस शासनादेश के बाद अब 37 सिंचाई की नहरें, 214 हेक्टेयर भूमि, 266 आवास और दो गेस्ट हाउस उत्तराखंड के अधीन हो जाएंगे.

उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव सुरेश चंद्रा ने 26 दिसंबर को जारी शासनादेश प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष सिंचाई व जल संस्थान विभाग उत्तर प्रदेश के साथ ही निजी सचिव मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन को भेज दिया है.

परिसंपत्तियों के हस्तांतरण की कार्यवाही स्थानीय स्तर के दोनों राज्यों के अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से चिन्हीकरण कर की जाएंगी. शासनादेश में हरिद्वार जिले को 28 और ऊधमसिंह नगर को 9 नहरें हस्तांतरित की जानी हैं.

हालांकि हस्तांतरित होने वाली नहरों का मुख्य नहर के शीर्ष से 100 मीटर की दूरी तक का भाग यूपी सिंचाई विभाग के नियंत्रण में ही रहेगा. इसके अलावा यूपी सिंचाई विभाग के अधीन भवनों व अनुपयुक्त भूमि में से 25 प्रतिशत भवन व भूमि उत्तराखंड को स्थानीय स्तर पर दोनों राज्यों की आपसी सहमति के बाद हस्तांतरित कर दी जाएंगी.

गौरतलब है कि 25 प्रतिशत के हिसाब से उत्तराखंड को 214 हेक्टेयर भूमि और 266 आवास व दो गेस्ट हाउस मिलेंगे.

इन संपत्तियों के चिन्हीरण की प्रक्रिया 14 दिसंबर को हरिद्वार में हुई दोनों राज्यों के मुख्य अभियंताओं की बैठक के बाद शुरू हो गई थी. हरिद्वार को मिलने वाली 28 नहरों में से 27 मुख्य अभियंता (गंगा) मेरठ-यूपी के अधीन हैं, जबकि एक कांगड़ी नहर मुख्य अभियंता (पूर्वी गंगनहर) मुरादाबाद के नियंत्रणाधीन है.

शासनादेश में कहा गया है कि दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों की 2 फरवरी 2015 में नई दिल्ली में बैठक थी. जिसमें परिसंपत्तियों के बंटवारे पर लिए गए निर्णय के अनुसार कार्यवृत्त जारी किया गया है. सिंचाई खंड हरिद्वार के उप राजस्व अधिकारी एनएस कुंडरा ने बताया कि शासनादेश जारी होने के बाद जल्दी ही स्थानीय स्तर हस्तांतरण की काम शुरू हो जाएगा.