राम गोपाल यादव बोले, ‘मेरा व अखिलेश का निष्कासन असंवैधानिक’

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ अपने को समाजवादी पार्टी से छह वर्ष के लिए निष्कासित करने के पार्टी के मुखिया के फैसले को राज्यसभा सदस्य प्रो. राम गोपाल यादव ने असंवैधानिक बताया है. राम गोपाल यादव पार्टी के मुखिया के इस फैसले से काफी आहत भी हैं.

पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव जैसे महत्वपूर्ण ओहदे पर रहे प्रोफेसर ने कहा कि बिना जवाब सुने किसी को पार्टी से निकालना गलत बात, मुझे और अखिलेश को बिना गलती के बाहर निकाला गया.

पार्टी की ओर से हमको ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया था. कम से कम पार्टी के मुखिया को हमारे जवाब का तो इंतजार करना ही चाहिए था. हमारा निष्कासन बिना हमारा पक्ष सुने कर दिया गया है. यह कतई तर्कसंगत नहीं है. यह न सिर्फ गलत परिपाटी है बल्कि असंवैधानिक भी है.

राम गोपाल ने कहा कि मैं तो यह ही करूंगा कि विधानसभा चुनाव के लिए जारी अखिलेश यादव की सूची ही सबसे अच्छी है. अब भी अखिलेश के घोषित प्रत्याशी ही मेरे प्रत्याशी हैं. उन्हीं के समर्थन में विधानसभा चुनाव प्रचार करूंगा.

राम गोपाल ने कहा कि अभी चार दिन पहले ही दिल्ली में भेंट हुई थी तो नेताजी ने कहा था कि एक जनवरी को लखनऊ आना है. इससे पहले ही उन्होंने पार्टी के प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी.

राम गोपाल यादव ने कहा जनता ने अखिलेश यादव को फिर मुख्यमंत्री बनाने का मन बना लिया है. अखिलेश यादव विरोधी विधानसभा का मुंह नहीं देख पाएंगे. अखिलेश के प्रत्याशी सपा के निशान पर लड़ेंगे या मुलायम के घोषित प्रत्याशी पर उन्होंने कहा कि यह फैसला निर्वाचन आयोग को करना है.

उन्होंने दोहराया कि वह पहले ही पत्र लिखकर कह चुके थे कि पार्टी में रहें अथवा न रहें, अखिलेश का समर्थन करेंगे. उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद सपा नए स्वरूप में नजर आएगी और स्थितियां बदलेंगी और एक बार फिर से सब कुछ ठीक होगा.