उत्तरकाशी: जो सरकार और इंजीनियर नहीं कर सके, इन महिलाओं ने कर दिखाया

पहाड़ की नारी के जज्बे को सलाम. जिस काम को तंत्र और उसके इंजीनियर नहीं कर पाए, उसे नारी शक्ति ने न सिर्फ अपने हाथों में लिया ही नही बल्कि सफलता की ओर भी कदम बढ़ा लिया है.

ये खबर विकास भवन उत्तरकाशी से एक किलोमीटर दूर स्थित डांग गांव की है जहा महिलाएं इन दिनों घर-गृहस्थी की परवाह किए बिना गत 11 दिसंबर से गांव के लिए सड़क काटने में हुई जुटी हैं. इस अभियान का नेतृत्व कर रही ग्राम प्रधान रजनी देवी नाथ कहती हैं कि गांव तक 700 मीटर सड़क आगामी 11 जनवरी तक बनकर तैयार हो जाएगी.

डांग गांव में करीब 97 परिवार रहते हैं. वर्तमान में इस ग्राम पंचायत में सभी पंचायत सदस्य महिलाएं हैं. इसी ग्राम पंचायत के राजस्व ग्राम पोखरी तक एनआइएम बैंड से सड़क ले जाई जा रही है. सड़क बनाने का जिम्मा लोनिवि के पास है. लेकिन, डांग के ग्रामीणों की मांग है कि पोखरी के लिए सड़क डांग से होते हुए ले जाई जाए. ताकि डांग को भी सड़क सुविधा का लाभ मिल सके. साथ ही गांव के ऊपर का जंगल भी बचा रहे.

ग्रामीणों की इस मांग को अनदेखा कर दिया गया. ऐसे में डांग की महिलाओं ने 11 दिसंबर से गड्डू गाड गदेरे के निकट से खुद ही सड़क काटनी शुरू कर दी.

वन पंचायत की सरपंच सुलोचना कलूड़ा बताती हैं कि जब भी डांग के ग्रामीणों ने सड़क की मांग की तो लोनिवि के अधिकारियों से जवाब मिला कि डांग गांव से सड़क नहीं जा सकती. इसलिए गांव की महिलाओं ने ठान लिया कि वह खुद ही गांव तक सड़क पहुंचाएंगी.

सड़क निर्माण के कार्य में डांग की 40 महिलाएं जुटी हैं. इनमें शामिल 81 वर्षीय अतरा देवी कहती हैं कि वह सब्बल और गैंती तो नहीं उठा सकती, पर काम पर जुटी महिलाओं के लिए चाय-पानी की व्यवस्था तो कर ही सकती है.

महिलाओं के इस जज्बे और जुनून को देख लगभग 20 पुरुष भी इस अभियान में सहभागी बने हुए हैं. डांग निवासी डॉ. नागेंद्र दत्त जगूड़ी कहते हैं कि डांग गांव का जंगल बचाने से लेकर गांव तक सड़क पहुंचाने में मातृ शक्ति का समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति पूरे गांव को ताकत दे रही है.