नोटबंदी : पीएम मोदी को घेरने की कोशिश में एक-दूसरे से होड़ करते दिखे विपक्षी नेता

नोटबंदी ख़त्म होने की काउंटडाउन शुरू है. जहां विपक्ष इसे विफल बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसकी कामयाबी का बखान कर रहा है. महाराष्ट्र, गुजरात और चंढ़ीगढ़ के नगर पालिका चुनाव परिणामों से नोटबंदी को सफल माना जा सकता है. लेकिन आगे यूपी, उत्तराखंड और पंजाब के चुनाव हैं, जहां विपक्ष के साथ ही पीएम मोदी की साख दांव पर लगी है. यूपी से अपने साथ 72 सांसदों का एक बड़ा कुनबा लेकर मोदी पीएम की कुर्सी तक पहुंचे हैं. ऐसे में यूपी का चुनाव अहम हो जाता है. नोटबंदी की सफलता और विफलता इन चुनावों में बड़ा किरदार अदा करेगी.

8 नवंबर की रात जब विपक्ष सर्जिकल स्ट्राइक से राजनीतिक नफा-नुकसान का आंकलन कर रहा था. इसी बीच पीएम मोदी ने 500 और 1000 के नोटों के चलन को बंद कर सबको हैरत में डाल दिया. हालांकि कुछ दिन बाद समूचा विपक्ष सक्रिय हुआ और नोटबंदी को आर्थिक आपातकाल करार देते हुए संसद को ठप्प रखा. लेकिन इसी बीच राहुल मोदी से मिले और विपक्षी एकता तार-तार हो गयी. वहीं नोटबंदी को भ्रष्टाचार और कालेधन पर प्रहार बताते हुए मोदी ने आम जनसभाओं में अपनी बात मजबूती से रखना जारी रखा. जहां वो विपक्ष से एक कदम आगे खड़े नजर आए. हालांकि बाद में राहुल गांधी ने मोदी के जवाब में कई रैलियों की और उन पर सहारा और बिरला ग्रुप से फंड जुटाने का आरोप लगाया. इस मुद्दे पर भी राहुल गांधी को विपक्ष का पूरा सहयोग नहीं मिला.

दरअसल मोदी सरकार विपक्ष को तैयारियों का मौका नहीं दे रही है. बीते एक साल में हुआ यूं कि जब विपक्ष ने मोदी की विदेश नीति को मुद्दा बनाया तो मोदी ने पाकिस्तान का दौरा कर, विपक्ष की रणनीति पर पानी फेर दिया. पठानकोट और उड़ी हमले के मुद्दे पर सर्जिकल स्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक के बाद नोटबंदी. अब विपक्ष जितने भी दावे करें कि नोटंबदी को बिना तैयारी के अमलीजामा पहनाया गया. लेकिन हकीकत यह भी है कि विपक्ष को भी बीते एक साल में मुद्दों पर तैयारी का मौका नहीं मिला.