कुदरती खजाने से भरपूर इस गांव पर भी पड़ी ड्रग माफिया की नजर

समुद्रतल से 7000 फीट की ऊंचाई पर ग्लेशियर की पहाड़ियों से लदा गंगी गांव समिप एक से बढ़कर एक दुर्लभ जड़ी-बूटियां मौजूद हैं(अतीस, कुटकी, वत्सनाथ, वन ककड़ी, बज्रदंती, ककरिया, शिलाजीत, कीड़ा जड़ी आदि). जिनका दवाइयां बनाने में उपयोग होता है. इन्हीं के दोहन के लिए गंगी गांव के आसपास पिछले कुछ समय से माफिया के एजेंट सक्रिय हैं. वे बुग्यालों से इन दुर्लभ जड़ी-बूटियों की सप्लाई माफिया को कर रहे हैं.

भिलंगना ब्लॉक के खतलिंग ग्लेशियर और पंवालीकांठा बुग्याल की तलहटी में गंगी गांव बसा है. इस क्षेत्र में मौजूद जड़ी-बूटियां कैंसर से लेकर यौनवर्धक दवाएं बनाने तक के काम में आती हैं. इनमें से कई जड़ी-बूटियों पर तो खुले बाजार में बेचने पर प्रतिबंध है. बावजूद इसके माफिया गंगी गांव की पहाड़ियों पर बिखरे खजाने को लूटने पर आमादा हैं.

ग्रामीणों ने बताया कि यहां कई लोग जड़ी-बूटी की तलाश में आते हैं. आसपास स्थित कुछ गांवों के लोग भी यहां पर माफिया का एजेंट बनकर काम कर रहे हैं. वह अपनी पहचान गुप्त रखते हैं और सीजन में घुत्तू-घनसाली आकर जड़ी बूटियों की डिलीवरी करते हैं. इसके बदले उन्हें अच्छी-खासी रकम मिल रही है. इससे पर्यावरण के लिए भी खतरा पैदा हो गया है. लेकिन, कोई भी जिम्मेदार इस पर कार्रवाई करने को तैयार नहीं.

पिछले साल भी वन विभाग ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया था कि बुग्यालों में जड़ी-बूटियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है. अगर बचाव नहीं किया गया तो कई दुर्लभ जड़ी-बूटियां विलुप्त हो जाएंगी.