पीएम मोदी की देहरादून रैली ने खींच दी बड़ी लकीर, अब राहुल गांधी को ला पाएगी कांग्रेस?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है. पीएम नरेंद्र मोदी की अस्थायी राजधानी देहरादून में हुई रैली जहां भाजपाइयों में उत्साह का संचार कर गई, वहीं कांग्रेसियों की पेशानी पर बल भी डाल गई. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रदेश कांग्रेस राहुल गांधी को देहरादून में रैली के लिए ला पाएंगे.

देहरादून में कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी की रैली को टालती जा रही कांग्रेस के सामने अब दोहरी चुनौती है. उसे न सिर्फ राहुल की रैली करानी है, बल्कि पीएम मोदी की रैली के बराबर उसे हिट भी बनाना है.

दरअसल, मोदी की रैली में उमड़े जनसैलाब ने भाजपाइयों को भी अचरज में डाल दिया है. राहुल गांधी के नोटबंदी पर लगातार हमले के बाद कांग्रेसियों की पीएम की रैली पर नजर थी और वे ये मानकर बैठे थे कि रैली में शायद उतनी भीड़ न जुटे जितने बीजेपी दावे कर रही है.

भीड़ जुटने को नोटबंदी के फैसले से जोड़ा जाए तो कांग्रेस का गणित गड़बड़ाता दिख रहा है. ऐसे में कांग्रेस के सामने नए सिरे से मंथन करने की चुनौती रहेगी. सियासी जानकारों की मानें तो जनसभाओं में जुटी भीड़ चुनावी जीत और हार का बेशक प्रमाण न हो, मगर सियासी दलों के लिए यह मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने का काम जरूर करती है.

साथ ही विरोधियों के मनोबल को गिराने में भी मदद करती है. जाहिर है कि रैली की कामयाबी को लेकर कांग्रेस चाहे जो तर्क गढ़े, मगर उस पर निश्चित तौर पर दबाव बढ़ गया है. लंबे समय से पार्टी अस्थायी राजधानी देहरादून में राहुल गांधी की रैली कराने का जतन कर रही है. मगर हर बार उसके प्रयास नाकाम हो जाते हैं.

टिहरी संसदीय क्षेत्र की सतत विकास संकल्प यात्रा का समापन राहुल गांधी की दून रैली से ही होना था, लेकिन राहुल नहीं आए. इसके बाद राहुल की रैली का कार्यक्रम फिर तय हुआ. मगर राहुल रैली करने अल्मोड़ा चले गए. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने सफाई दी कि परेड ग्राउंड में चूंकि कुछ व्यापारिक प्रदर्शनियां लगी हैं, इसलिए पार्टी उनमें खलल नहीं डालना चाहती थी.

सच्चाई जो भी हो, लेकिन राहुल की रैली टलने की वजह संगठन और सरकार के बीच छिड़ी आपसी लड़ाई भी मानी गई. इस बीच पीएम का अचानक दून रैली का कार्यक्रम बना और अब वे जनसभा करके चले भी गए हैं. ऐसे में अब सबकी निगाहें कांग्रेस पर होंगी. बेशक कांग्रेस रैली में जुटी भीड़ को भाड़े की करार दे रही है, मगर वह इसकी कामयाबी को लेकर उसके पास कोई जवाब नहीं है.

अब प्रश्नों के घेरे में वह स्वयं हैं. प्रश्न यह है कि अब कांग्रेस देहरादून में राहुल गांधी की रैली कराने का साहस करेगी? रैली के जरिए पीएम मोदी जनसैलाब की जो लकीर खींच गए हैं, उसे लांघ पाएगी?