हरिद्वार : यहां भरतपुर में गीता-बबीता की तरह ‘दंगल’ करती हैं कीर्ति-प्रीति

पिछले हफ्ते रिलीज हुई फिल्म ‘दंगल’ के बारे में तो आपने सुना ही होगा. इस फिल्म से ज्यादा चर्चाओं में दो बहनें गीता और बबीता है, जो इस फिल्म में पहलवान यानी कुश्ती खिलाड़ी बनी हैं.

रील लाइफ की गीता और बबीता को आपने अभी तक भले ही देखा हो या नहीं, लेकिन जिस तरह से असली जिंदगी में गीता और बबीता हरियाणा में हैं, वैसी ही उत्तराखंड में भी दो बेटियां हैं. जिन्होंने पिता के कहने पर कुश्ती को अपनाया.

फिल्म ‘दंगल’ की गीता और बबीता हरिद्वार जिले के भरतपुर गांव की प्रीति और कीर्ति. अब आप कहेंगे कि दंगल फिल्म की गीता-बबीता और भरतपुर की प्रीति और कीर्ति में क्या समानता है. असल बात तो यह है कि इनमें अलग कुछ भी नहीं है. गीता-बबीता की कहानी प्रीति और कीर्ति दोहरा रही हैं. दंगल देखकर ऐसा लगता है जैसे यह प्रीति और कीर्ति की ही कहानी है. भरतपुर गांव के ओंमवीर सिंह की भी दो पहलवान बेटियां कीर्ति और प्रीति हैं.

दोनों बेटियों ने पिता ओमबीर के कहने पर कुश्ती को अपनाया. आज कीर्ति सोनीपत में रेसलिंग कोच के रूप में काम कर रही हैं और प्रीति आस-पास के खिलाड़ियों को कुश्ती सिखाने का काम कर रही हैं. प्रीति कहती हैं कि मन में ठान लो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं होता. पहलवानी पर पुरुषों का एकाधिकार समझा जाता था लेकिन अब इसमें लड़कियां भी आगे आ रही हैं.

कीर्ति का कहना है कि उन्होंने अपने पिता ओमवीर के कहने पर कुश्ती में करियर बनाने का फैसला लिया था. कुश्ती में उत्तराखंड की खिलाड़ी भी दंगल की गीता और बबीता की तरह नाम कमा सकती हैं, लेकिन राज्य की सरकार इस ओर ध्यान नहीं देती है. सरकार खेल पर ध्यान ही देती हैं, वरना उत्तराखंड की बेटियां भी किसी से कम नहीं है.

पहलवान ओमवीर सिंह का कहना है खिलाड़ी हम तैयार करते हैं और नाम दूसरे राज्यों का होता है. उन्होंने घर पर अपनी दोनो बेटियों को कुश्ती सिखाई है और दोनों कुश्ती में अपने हाथ आजमा रही हैं.

गौरतलब है कि मंगलौर क्षेत्र भरतपुर गांव की कीर्ति और प्रिति दंगल फिल्म में ना हो लेकिन ये भी किसी गीता बबीता से कम नहीं है पिता ओमवीर से पहलवानी सीख कर इन्होंने राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर मैडल जीते हैं. प्रीति और कीर्ति जैसी बेटियों पर पूरे समाज को फख्र है.