देहरादून आए पीएम मोदी ने राज्य में विकास और रोजगार का सपना दिखाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ‘चारधाम’ की तरफ जाने वाली हर मौसम के उपयुक्त सड़कों की एक महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखते हुए कहा कि वह उत्तराखंड को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं, ताकि रोजगार के अवसरों की कमी के कारण राज्य के युवाओं को बाहर जाने पर मजबूर न होना पड़े.

उन्होंने कहा, ‘उत्तराखंड की पहाड़ियों में एक पुरानी कहावत है जिसका मतलब है कि पर्वतों के जलाशय एवं युवा उस भूमि की सेवा नहीं कर पाते, जहां उनका जन्म होता है. मैंने इसे गलत साबित करने का फैसला किया है.’ पीएम मोदी ने आधारशिला रखने के समारोह के बाद अस्थायी राजधानी देहरादून के परेड ग्राउंड में ‘परिवर्तन महारैली’ में कहा, ‘मैं उत्तराखंड को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहता हूं जहां लोग परिस्थितियों के कारण हिमालय में स्थित अपने घर छोड़ने और काम की तलाश में शहरों की गंदी सड़कों पर अपनी जिंदगी गुजारने के लिए मजबूर न हों.’ 900 किलोमीटर लंबी चारधाम राजमार्ग विकास परियोजना में 12,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा.

परियोजना से हिमालय के पर्वतों में स्थित चारधाम- बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री एवं केदारनाथ की हर मौसम में निर्बाध सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित होगी. 2013 में राज्य में आई भीषण आपदा में चार धाम बुरी तरह प्रभावित हुए थे.

प्रधानमंत्री ने लोगों से उत्तराखंड को ‘भ्रष्टाचार के उस अथाह गड्ढ़े’ से बाहर निकालने का वादा किया, जिसमें ‘वह मौजूद सरकार के शासन में सड़ रहा है.’ उन्होंने कहा कि राज्य को समस्याओं से बाहर निकालने के लिए एक दोहरे इंजन की जरूरत है, जिसमें एक केंद्र तथा दूसरा राज्य की राजधानी में होगा.

प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में राहत कोषों में कथित घोटाले की तरफ इशारा करते हुए कहा कि पांच लीटर ईंधन की क्षमता वाला एक स्कूटर भी 35 लीटर ईंधन पी सकता है. उन्होंने कहा, ‘पांच या 50 लोग उत्तराखंड को भ्रष्टाचार के उस अथाह गड्ढ़े से नहीं निकाल सकते जिसमें वह पड़ा है.’

पीएम मोदी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की सरकार लाने और बीजेपी को राज्य का गठन करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा परिकल्पित उत्तराखंड के निर्माण का मौका देने की अपील करते हुए कहा, ‘राज्य को इस बड़े प्रयास के लिए बीजेपी के दोहरे इंजन की जरूरत है, एक दिल्ली में और दूसरा देहरादून में.’

उन्होंने परियोजना को 2013 के आपदा में मारे गए पूरे भारत के हजारों श्रद्धालुओं को समर्पित करते हुए कहा कि हर मौसम के उपयुक्त सड़कों से ना केवल पहाड़ों में युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसरों का सृजन होगा बल्कि चार धाम की यात्रा के लिए आने वाले लोगों में सुरक्षा की भावना भी बढ़ेगी.

पीएम मोदी ने कहा कि इससे चार धाम की यात्रा पर निकलने वाले लोगों में हर तरह के मौसम में आपदा की दृष्टि से संवेदनशील रास्ते पर सभी डर को हटाकर पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि परियोजना की कल्पना अंतरराष्ट्रीय परामर्शदाताओं की मदद से की गई है, ताकि किसी भी मौसम में रास्ते में कोई बाधा नहीं आए.

प्रधानमंत्री ने परियोजना शुरू करने में हुई देरी को लेकर कहा कि वह चाहते थे कि राज्य के विकास के लिए वास्तव में कुछ किया जाए और वह विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के नाम पर राजनीति करना या फर्जी तामझाम करना नहीं चाहते थे, जैसा कि कुछ राजनीतिक दल कर रहे हैं.

पूर्व सैनिकों की ओर से की जा रही ‘वन रैंक वन पेंशन’ की मांग का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 40 साल से ज्यादा समय तक देश पर शासन करने वाली पार्टी और परिवार ने 2014 के लोकसभा चुनाव की पूर्व संध्या तक कुछ नहीं किया. उत्तराखंड उन राज्यों में शामिल है जहां से हजारों युवा सेना में सेवाएं देने जाते हैं.

उन्होंने कहा कि आम चुनावों से पहले यूपीए सरकार ने महज 500 करोड़ रुपये आवंटित किए, क्योंकि उन्हें ‘डर था कि सैनिकों से विशेष प्रेम करने वाले मोदी कहीं कोई कदम न उठा दे.’ प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वन रैंक वन पेंशन’ पर 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आएगा, जो उनकी सरकार पहले ही किस्तों में दे चुकी है. उन्होंने कहा कि सैनिकों ने उनकी दिक्कत को समझा कि पूरी रकम एक ही बार देना संभव नहीं है. वे इसे किस्तों में लेने पर सहमत हुए.

उन्होंने कहा कि विकास उनकी सरकार का एकमात्र उद्देश्य है और वह लगातार इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश के ईमानदार लोगों को सशक्त बनाने के लिए नोटबंदी का फैसला किया गया.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘क्या आपने मुझे उद्घाटन समारोहों में फीते काटने और मोमबत्तियां जलाने के लिए 2014 में जनादेश दिया था?’ उन्होंने पूछा, ‘क्या आपने मुझे लड़कर भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए वोट नहीं दिया? क्या हमें पूरी ताकत से इस बुराई से नहीं लड़ना चाहिए?’