नोटबंदी के बाद पैसे ने अपना अज्ञातवास खत्म कर दिया : अरुण जेटली

वित्त मंत्री अरूण जेटली -फाइल फोटो

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को कहा कि पिछले माह बड़े मूल्य वर्ग के नोटों को बंद करने के बाद बैंकों में जो नोट जमा किए जा रहे हैं, उनकी अपनी पहले वाली गुमनामी खत्म हो चुकी है. अब जो भी धन बैंकों में जमा है, उससे भारतीय बैंकिंग व्यवस्था मजबूत हुई है.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए आयोजित डिजिधन मेले में जेटली ने कहा, ‘नोटबंदी के बाद अब जो धन नकदी के रूप में जमा किया जा रहा है, उस धन का अज्ञातवास खत्म हो गया है.’

उन्होंने कहा, ‘यह धन बैंकिंग व्यवस्था में आया तो यह व्यवस्था मजबूत हुई और अब ग्रामीण विकास, सामाजिक कल्याण के लिए धन उपलब्ध है.’

उन्होंने कहा कि यह जो धन आया है, वह कर व्यवस्था का भी हिस्सा है. इस कदम का दीर्घकालिक लाभ यह है कि आभासी, समानांतर अर्थव्यवस्था जिस पर कर नहीं चुकाया गया, जिसकी गणना नहीं की गई, जो किसी के प्रति जवाबदेह नहीं थी, वह अब आर्थिक व्यवस्था का हिस्सा बन गई है.

वह खचाखच भरे विज्ञान भवन में लोगों को संबोधित कर रहे थे. आठ नवम्बर को सरकार ने 1000 और 500 के नोटों को अमान्य घोषित कर दिया था. सरकार ने कहा था कि उसका यह कदम कालाधन, नकली नोट और आतंक के वित्त पोषण के खिलाफ है. जनता को 30 दिसम्बर तक बैंकों में पुराने नोट जमा करने का समय दिया गया था.

जेटली ने जोर देकर कहा कि अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण से एक बेहतर, बड़ी और साफ सुथरी अर्थव्यवस्था मिलेगी. विपक्ष और मीडिया के एक वर्ग पर ताना मारते हुए जेटली ने कहा कि आम जनता नोटबंदी और कैशलेस अर्थव्यवस्था के लाभ को समझती है लेकिन कुछ नेताओं और मीडिया को सामान्यतया बातें देर से समझ में आती हैं.

डिजिटल तरीके से लेनदेन को बढ़ावा देना सुनिश्चित करने के लिए सरकार के विभिन्न उपायों का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि 31 दिसम्बर के बाद भी जो लोग डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड से भुगतान करेंगे, उन्हें इनका इस्तेमाल करने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि केवल व्यापारियों को 2000 रुपये से कम पर 0.25 प्रतिशत और इससे अधिक के लेन-देन पर 0.5 प्रतिशत चार्ज देना होगा जो पहले एक प्रतिशत लगता था. कार्यक्रम में कार्ड से लेनदेन करने वाले लकी ग्राहक योजना के 15 हजार विजेताओं के ट्रांजैक्शन कोड सार्वजनिक किए गए.

जिन विजेताओं ने नौ नवम्बर से 21 दिसम्बर के बीच रुपे, यूपीआई, एईपीएस या यूएसएसडी कोड से लेनदेन किया है, उनके बैंक खातों में अगले 72 घंटे के अंदर यह पुरस्कार राशि चली जाएगी.