स्टिंग मामले में गर्दन फंसती देख ‘हरदा’ ने दिए बीजेपी राज में हुए घोटालों के घुलासे के संकेत

मुख्यमंत्री हरीश रावत स्टिंग मामले में अपनी गर्दन फंसती देख बीजेपी के राज में हुए घोटालों की जांच सार्वजनिक कर सकते हैं. उन्होंने कई मामलों को गिनाते हुए जांच के खुलासे के संकेत भी दिए हैं.

इसे उनकी सोची समझी रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है. जांच आयोग पहले ही इन जांच रिपोर्टों को सरकार को सौंप चुका है. समझा जा रहा है कि अब चुनाव से पहले इन्हें सार्वजनिक कर बीजेपी को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया जा सकता है.

पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार में इक्का-दुक्का नहीं, बल्कि 58 कथित घोटालों की जांच आयोग को सौंपी गई थी. इसमें करोड़ों की भूमि से संबंधित स्टर्डिया मामला, बीज घोटाले सहित कई मामलों की जांच डेढ़ साल पहले पूरी हो चुकी है और इसके लिए गठित जांच आयोग इसे सरकार को सौंप भी चुका है, लेकिन अब चुनाव से ठीक पहले सरकार को इन मामलों की याद आई है. इसे सरकार सार्वजनिक करने का मन बना रही है. मुख्यमंत्री का कहना है कि जनता को भी जांच में आए तथ्यों को जानने का अधिकार है.

स्टिंग मामले में सीबीआई के सामने पेशी से ठीक एक दिन पहले मुख्यमंत्री ने इन मामलों के खुलासे के संकेत देते हुए कहा कि वे समझते हैं कि जनता भी यह जाने कि जांच में क्या तथ्य आए हैं? मुख्यमंत्री ने कहा कि एनएचएम मामले की उन्होंने सीबीआई से जांच की संस्तुति करने को कहा था, वहीं आपदा के मामले में भी सरकार जांच को तैयार हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन मामलों को सार्वजनिक करने में कोई दिक्कत नहीं है. मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के बागी विधायक और पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत का नाम लिए बगैर उन पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि देहरादून के सेलाकुई जैसे क्षेत्र में सौ बीघा जमीन यूं ही किसी को नहीं मिलती.

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को सरकार में दायित्व देकर उन्होंने उनका सम्मान किया है. जिसकी जहां उपयोगिता समझी, उसे वहां दायित्व दिया गया. अब तक जितने भी मुख्यमंत्री रहे हैं, इस मद में वे सबसे कम खर्च करने वाले सीएम हैं.