‘हरदा’ ने उम्मीदों को लगाया ग्रहण, अब मौजूदा कांग्रेस सरकार नहीं बनाएगी नए जिले

उत्तराखंड में चुनाव से पहले नए जिलों की चर्चा पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अब विराम लगा दिया है. कांग्रेस संगठन की ओर से सरकार को विधानसभा चुनाव से पूर्व नए जिले बनाने का सुझाव दिया गया था. संगठन की ओर से इसके लिए दबाव भी बनाया गया, लेकिन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने साफ कर दिया है कि जिले बनाने के लिए पर्याप्त समय और तैयारियां नहीं हैं. मतलब साफ है कि अब नए जिलों पर फैसला नई सरकार ही लेगी.

उत्तराखंड में जिले बनाने की मांग बीजेपी सरकार के समय से चली आ रही है. पहले बीजेपी सरकार इस मांग को पूरा नहीं कर पाई और अब कांग्रेस सरकार भी कार्यकाल पूरा करने के करीब है, लेकिन चुनावी घोषणापत्र में यह वादा होने के बावजूद जिलों की मांग अधूरी ही रह गई है.

कुछ दिन पहले प्रदेश कांग्रेस संगठन की ओर से अपनी पार्टी की सरकार को नए जिले बनाने का सुझाव दिया गया. जिससे उम्मीद जगी कि संगठन की मांग पर सरकार पांच नए जिले बनाने की घोषणा कर सकती है. इस तरह की चर्चा भी आई कि 23 दिसम्बर को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की अल्मोड़ा रैली में सीएम हरीश रावत नए जिले बनाने की घोषणा कर सकते हैं.

संगठन भी यही चाहता था कि राहुल गांधी की रैली में नए जिलों की घोषणा कर कांग्रेस चुनावी माइलेज हासिल करें, लेकिन रैली में ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई. नए जिलों के मामले पर मुख्यमंत्री हरीश रावत से सवाल पूछा गया तो जवाब में हरीश रावत ने कहा कि बिना योजना के जिले नहीं बन सकते. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आधा काम कर लिया गया है.

उन्होंने कहा, राज्य में रिकॉर्ड तहसील और उप-तहसील बनाई गई हैं. नगर पालिका और नगर पंचायतें बनाई गई हैं. छोटी इकाइयों से लोगों को लाभ मिला है. मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने 2016 के बजट में नए जिलों के गठन के लिए बजट का प्रावधान भी किया था.

मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही उनके ध्यान में नए जिले थे. लेकिन पहले आपदा के जख्म भरने में एक-डेढ़ साल लग गया और फिर जब तक संभले तब राज्य की सरकार को गिरा दिया गया. इसमें काफी समय बर्बाद हो गया.