हरीश रावत और किशोर उपाध्याय एक बार फिर आमने-सामने, पीसीसी चीफ का नया पैंतरा

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के लिए टिकटों को लेकर कांग्रेस में मंथन का दौर शुरू हो गया है. इसी के साथ अंदरूनी तलवारें भी अब सियासी मयानों से बाहर निकल चुकी हैं. पीडीएफ और ‘एक परिवार, एक टिकट’ के बहाने संगठन और सरकार एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं.

टिकटों को लेकर कांग्रेस में टकराहट साफ देखी जा सकती है. जैसी कि आशंका कांग्रेस के गलियारों में जतायी जा रही थी, वो संकट अब पार्टी बैठकों में गहराने भी लगा है. पीडीएफ को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष लंबे समय से विरोध का राग अलाप रहे थे, अब प्रदेश चुनाव समिति की पहली बैठक में पीडीएफ पर सीएम रावत और किशोर उपाध्याय आमने-सामने आ गए.

पार्टी सूत्रों ने खुलासा किया है कि किशोर ने 70 सीटों पर कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने की बात कही. इस पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने संकट के साथियों को साथ रखने का तर्क देते पीडीएफ की पैरोकारी की. सूत्र बताते हैं कि पीडीएफ कोटे के मंत्रियों में हरीश चन्द्र दुर्गापाल और मंत्री प्रसाद नैथानी कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ सकते हैं. जबकि प्रीतम पंवार की स्थिति निर्दलीय लड़ने को लेकर 2012 से कमोबेश साफ रही है.

हालांकि अब प्रीतम पंवार यमुनोत्री से धनौल्टी पलायन की तैयारी में हैं जहां से कांग्रेस उपाध्यक्ष जोतसिंह बिष्ट ताल ठोक रहे हैं. लेकिन असल जंग का मैदान टिहरी सीट बनी हुई है. किशोर उपाध्याय को शिकस्त देने वाले दिनेश धनै टिहरी से निर्दलीय ताल ठोक रहे हैं और गाहे-बगाहे किशोर को ललकारते भी नजर आते हैं. ऐसे में पीसीसी चीफ टिहरी और ऋषिकेश के बीच झूलने को मजबूर दिख रहे हैं. लिहाजा संगठन भी पीडीएफ पर पेंच फंसाए रखना चाहता है, जबकि मुख्यमंत्री चुनाव बाद के समीकरण भांपकर इन नेताओं को साधे रखना चाहते हैं.

प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी ने भी पीडीएफ पर ही फैसला छोड़ा है कि चुनाव पर पीडीएफ नेता खुद फैसला करें. वैसे कांग्रेस सरकार और संगठन में सिर फुटौव्वल की इकलौती वजह पीडीएफ ही नहीं है. सूत्र बताते हैं कि किशोर उपाध्याय ने एक परिवार एक टिकट का राग छेड़कर नया मोर्चा खोल दिया है. अब सवाल उठता है कि एक परिवार एक टिकट के तीर से किशोर किस पर निशाना साधना चाहते हैं.

बता दें कि खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत चाहते हैं कि उनकी बेटी अनुपमा रावत हरिद्वार ग्रामीण और बेटे वीरेन्द्र या आनंद रावत कुमाऊं की किसी सीट से विधानसभा चुनाव में उतरें. वहीं, कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य भी चाहते हैं कि उनके बेटे संजीव आर्य को नैनीताल सीट से चुनाव लड़ने का मौका मिले.

पीडीएफ पर लगातार मात खा रहे किशोर ने इसकी काट में नया पैंतरा खेल दिया है. हालाकि कांग्रेसी परिपाटी के अनुसार इस बार भी टिकटों को लेकर असल माथापच्ची दिल्ली दरबार में होनी है. लेकिन प्रदेश नेताओं में सियासी अदावत इतनी बढ़ चुकी है कि अंजाम जो हो दाव-पेंच आज़माने में कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही है.
सरकार और संगठन के मुखिया दांव-पेंच का खेल जमकर खेल रहे हैं लेकिन अंतिम फैसला पीसीसी चीफ किशोर उपाध्याय भी कांग्रेस आलाकमान पर छोड़ रहे हैं.

एक कहावत है कि कांग्रेस नेता चुनाव से पहले असल लड़ाई टिकटों को लेकर आपस में लड़ते हैं. उत्तराखंड के सियासी हालात जो हों, लेकिन कांग्रेस अपनी इस परम्परा को पूरी शिद्दत से निभाती दिख रही है.