हरीश रावत कैबिनेट ने लैंडयूज की श्रेणियां 48 से घटाकर 7 कीं, कई और अहम फैसले

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत -फाइल फोटो

उत्तराखंड में अब सिर्फ सात श्रेणियों में ही भू-उपयोग निर्धारित कर दिए गए हैं. अभी तक भू-उपयोग की 48 श्रेणियां थीं. राज्य कैबिनेट की बैठक में बुधवार को भू-उपयोग की श्रेणियां कम करने समेत कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई.

इसी क्रम में पिछले कैबिनेट के फैसले में संशोधन करते हुए आउटसोर्स एवं उपनल कर्मचारियों को आउटसोर्स से संविदा पर करने के लिए सेवा की समय सीमा आठ वर्ष से घटाकर सात वर्ष कर दी गई है.

एक अन्य फैसले में जौलीग्रांट से चिन्यालीसौड़, पिथौरागढ़ और गोचर के लिए शुरू होने वाली ट्रायल फ्लाइट (स्टेट प्लेन) में बीमार, बुजुर्गों और महिलाओं को मुफ्त यात्रा कराई जाएगी. इसके लिए जिलाधिकारी स्तर पर पात्रों का चयन किया जाएगा.

मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में बुधवार देर रात सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में तय हुआ कि एक जैसे कामों को एक ही लैंडयूज के अंतर्गत लाया जाए. इससे समान प्रकृति के कामों में लैंडयूज की दरें एक सी होंगी. हवाई सेवा के मामले में निर्णय किया गया कि चिन्यालीसौड़, गोचर और पिथौरागढ़ के लिए बुधवार को शुरू की गई सेवा को फिलहाल स्टेट प्लेन के जरिए संचालित किया जाएगा.

यह ट्रायल फ्लाइट होंगी, जिसे निजी कंपनी के रेगुलर फ्लाइट के शुरू करने के पूर्व तक लगभग महीने भर चलाया जाएगा. 23 दिसंबर को इसके लिए नौ सीटर प्लेन की पहली फ्लाइट चलेगी. यह कवायद जागरुकता के मकसद से की जा रही है.

टिहरी में तपोवन नगर पंचायत बनाने और उत्तरकाशी में चिन्यालीसौड़ व हरिद्वार में लक्सर नगर पंचायत को अपग्रेड कर नगर पालिका बनाने पर भी कैबिनेट ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी. इसी तरह लालकुआं नगर पंचायत का सीमा विस्तार करने पर भी सहमति बनी है.

एक अन्य फैसले में नगर निकायों में लंबे समय से कार्यरत 355 अतिरिक्त कर्मचारियों में से तकनीकी एवं आवश्यक सेवाओं में काम कर रहे कर्मियों को तत्काल नियमित करने की बात तय हुई है. इसी क्रम में नगर निकायों में काम करने वाले छह अधिशासी अधिकारियों को नियमित करने, ग्रामीण पेयजल समिति की पंपिंग परियोजनाएं जलसंस्थान को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट की मुहर लग गई.

स्वजल के तहत बनी वे ग्रामीण समितियां जिन पर बिजली का बिल बकाया था, उन्हें जल संस्थान को हस्तांतरित करने का फैसला लिया गया. इन पर बिजली बिल का करीब एक करोड़ रुपये बकाया है. पहले इन समितियों को व्यावसायिक के बजाए घरेलू दर पर बिजली देने के लिए कहा गया था, लेकिन विद्युत नियामक आयोग ने मना कर दिया था.