बातें डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था की, हकीकत- आज भी अंधेरे में है ‘यह गांव’

एक तरफ देशभर में डिजिटल इंडिया की चर्चाएं जोरों पर हैं, तो दूसरी तरफ कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहां आजादी के बाद से आज तक बिजली नहीं पहुंच पाई है. जी हां, ऐसा क्षेत्र कहीं और नहीं बल्कि दीये तले यह अंधेरा उसी टिहरी जिले में है जहां विश्व प्रसिद्ध विशाल टिहरी बांध हैं.

टिहरी जिले के सीमांत गांव गंगी के लोग आज भी बिजली-पानी सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीने को मजबूर हैं. मुख्यमंत्री हरीश रावत का गुरुवार 22 दिसंबर को गंगी का दौर प्रस्तावित है. वो पहले मुख्यमंत्री होंगे, जो गंगी पहुंचेंगे. जिससे गंगीवासियों को खासी उम्मीदे हैं.

गंगी गांव टिहरी जिला मुख्यालय से करीब 108 किलोमीटर दूर स्थित हिमालय श्रृंखला की तलहटी में बसा है. नई टिहरी जिला मुख्यालय से करीब 98 किलोमीटर सड़क मार्ग और उसके बाद करीब साढ़े दस किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई और पहाड़ियों के कच्चे रास्ते से गंगी पहुंचा जाता है. गंगी के करीब 150 परिवार वर्षों से अंधेरे में अपना जीवन गुजार रहे हैं और इनकी आजीविका का साधन पशुपालन और खेती है.

शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर गंगीवासी आज आधुनिकता के इस दौर में काफी पिछड़ चुके हैं. गांव में बिजली की राह देखते-देखते इनकी आंखे पथरा गई और कई पीढियां गुजर गईं, लेकिन बिजली नहीं पहुंची. धरने-प्रदर्शन हुए, वायदे किए गए, लेकिन बिजली के नाम पर गांव में सिर्फ पोल लगा दिए गए हैं.

गंगी के प्रधान नैनसिंह का कहना है कि हमारे गांव के लोगों ने आज तक मुख्यमंत्री को नहीं देखा है. 22 दिसंबर को मुख्यमंत्री रावत के गंगी के प्रस्तावित दौरे से गंगीवासियों को खासी उम्मीदें हैं.

टिहरी जिले के 15वें जिलाधिकारी के तौर पर एसएसपी पांगती अपने कार्यकाल 1975 में गंगी पहुंचे थे और वहां के लोगों की समस्याएं सुनी थी. मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर गंगीवासी कई बार आंदोलन कर चुके हैं. चुनाव बहिष्कार की भी चेतावनी दे चुके हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ झूठे आश्वासन ही मिले. टिहरी जिले के 50वें जिलाधिकारी इंदुधर बौड़ाई सीएम के दौरे से एक दिन पहले गंगी पहुंचे हैं और उन्होंने यहां कैंप कर गंगीवासियों की समस्याएं सुनीं.

गंगी का ये हाल तब है जब देश के 8 राज्यों को बिजली से रोशन करने वाला टिहरी बांध इसी जिले में है. लेकिन अब मुख्यमंत्री के दौरे से गंगीवासियों को कई उम्मीदें हैं. देखने वाली बात होगी कि आखिर कब गंगी का अंधेरा दूर होता है. कब गंगीवासियों की परेशानियां दूर होती है या फिर ये भी बस एक चुनावी दौरा बनकर ही रह जाएगा.