कांग्रेस ने घोषणापत्र में किया था वादा, अब साल 2017 में बनेंगे नए जिले

आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस घोषणापत्र में एक बार फिर से जिलों के गठन का चुनावी झुनझुना होगा. मिशन 2017 के लिए तैयार होने वाले कांग्रेस के घोषणापत्र में आम जनता के मन की बात होगी तो महात्मा गांधी से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का दर्शन भी नजर आएगा.

उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी की मौजूदगी में कांग्रेस की चुनाव घोषणापत्र समिति की बैठक में पिछले घोषणापत्र की समीक्षा हुई. पिछले घोषणापत्र में लागू की जाने वाली घोषणाओं को नए घोषणापत्र में भी स्थान मिलेगा.

बैठक में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पिछले घोषणापत्र में जिलों के गठन की घोषणा पर अमल नहीं होने की वजह भी गिनाई. उन्होंने कहा कि सरकार अगले चरण में जिलों के गठन की ओर बढ़ रही है. साल 2017 की शुरुआत में इस घोषणा को पूरा किया जाएगा.

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में करीब डेढ़ घंटे चली घोषणापत्र समिति की बैठक में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि नए जिलों का गठन अभी भले ही नहीं हुआ, लेकिन सरकार ने छोटी प्रशासनिक इकाइयों के रूप में तहसीलों और उप-तहसीलों की संख्या बढ़ाकर दोगुना कर दी है. नगर निकायों की संख्या में भी इजाफा किया गया है.

उन्होंने कहा कि सरकार पर संकट के चलते छह माह का व्यवधान हुआ. इससे जिलों का होमवर्क पूरा नहीं हो पाया. उन्होंने कहा कि वह जिलों को लेकर राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रयोग करना चाहते हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके कार्यकाल के तीन साल के दौरान 65 फीसद घोषणाओं पर अमल हो चुका है, जबकि 20 फीसद पर कार्य चल रहा है. 85 फीसद घोषणाओं का पूरा होना ऑल टाइम रिकॉर्ड है. उत्तरप्रदेश शासनकाल में भी 39 फीसद घोषणाओं पर अमल होता रहा है. यह राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि है.

उन्होंने कहा कि घोषणापत्र समिति के समक्ष सरकार के तौर पर वह एक बार फिर उपस्थित होंगे. उधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि 28 दिसंबर को कांग्रेस स्थापना दिवस के मौके पर ‘सुझाव आपके, लक्ष्य हमारा’ कार्यक्रम के जरिए जन अपेक्षाओं से जुड़ी घोषणाओं के बारे में सुझाव लिए जाएंगे.

थल सेनाध्यक्ष के रूप में जनरल बिपिन सिंह रावत की नियुक्ति पर कांग्रेस के केंद्रीय नेता भले ही उंगली उठा रहे हों, लेकिन मुख्यमंत्री हरीश रावत का रुख इस मामले में अलहदा है. उन्होंने कहा कि जनरल रावत की नियुक्ति योग्यता के आधार पर हुई है. इस फैसले से वह बेहद खुश हैं. जरूरत पड़ी तो वह प्रधानमंत्री को धन्यवाद देंगे.

कांग्रेस के केंद्रीय नेताओं की ओर से जनरल रावत की नियुक्ति पर विवाद किए जाने पर मुख्यमंत्री ने पार्टी का बचाव भी किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सैद्धांतिक बात कही है। सरकार और संगठन के बीच पीडीएफ के मुद्दे पर तनातनी के संबंध में मीडिया के सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि संगठन सास है और वह आज्ञाकारी बहू हैं.