देहरादून : शहीद स्‍थल पर पहुंचकर रो पड़े पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी

पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी मंगलवार को अचानक अस्थायी राजधानी देहरादून में कचहरी स्थित शहीद स्थल पहुंचे. इस दौरान शहीदों को नमन करते हुए और आंदोलनकारियों का दुख सुनते हुए वह भावुक हो गए और उनके आंखों से आंसू टपकने लगे. उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आंदोलनकारियों की जिस प्रकार से उपेक्षा हो रही है, उससे वह काफी दुखी हैं.

पत्नी उज्वला और बेटे रोहित शेखर तिवारी के साथ कचहरी पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री तिवारी ने पहले शहीदों की प्रतिमाओं पर फूल और माला अर्पित की और उनको याद कर वह अत्यंत भावुक हो गए. कहा कि जिन आंदोलनकारियों ने उत्तराखंड के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया आज उनकी व उनके परिजनों की उपेक्षा हो रही है. जिससे वह बेहद दुखी है.

शहीद स्थल पर बैठे आंदोलनकारियों से मुलाकात करते हुए आंदोलनकारियों के दुख सुनकर उनके आंखों से आंसू टपकने लगे. उन्होंने कहा कि जिस उम्मीद के साथ राज्य बनाया गया वह विकास अब तक नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में राज्य का विकास कर देश में पहले स्थान पर पहुंचाया जाएगा. कचहरी स्थित भवन पर अपने नाम की पट्टिका को देखकर उन्होंने कहा कि उन्होंने इस उद्देश्य से इस भवन का निर्माण करवाया था कि आंदोलनकारी यहां बैठकर राज्य के हित में सोच सके.

शहीद स्थल के बाद वह बार भवन पहुंचे. जहां बार काउंसिल के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल, महामंत्री अनिल गांधी सहित बार सदस्यों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. इस वकीलों से बात करते हुए भी बीच-बीच में भावुक हो गए.

उन्होंने कहा कि उन्होंने भी वकालत की है। लेकिन अपने जमाने में वकालत छोड़ वह गांधी जी के साथ सत्याग्रह आंदोलन की लड़ाई में कूद गए. अपने जवानी के दो साल उन्होंने देशभर में घूमकर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन की अलख जगाई. इस दौरान उन्होंने वकीलों से अपनी वकालत करने के साथ ही सामाजिक दायित्वों का भी पूरी तरह से निर्वहन करने की अपील की.