…तो इसलिए करुण नायर को मैच का और कोहली को सीरीज का ‘हीरो’ चुना गया

आखिरकार टीम इंडिया ने इंग्लैंड को हराने में 8 साल बाद सफलता हासिल कर ही ली, वह भी 4-0 के बड़े अंतर से. इस सीरीज में खुद कप्तान विराट कोहली का बल्ला खूब चला और उन्होंने टीम को सामने से लीड किया, जो उनकी कप्तानी की खासियत रही है. उनके अलावा बल्लेबाजों में मुरली विजय, चेतेश्वर पुजारा ने भी रन बनाए, वहीं गेंदबाजी में रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा छाए रहे. इन दोनों ने बल्ले से भी कमाल किया.

चेन्नई टेस्ट की बात करें, तो यहां करुण नायर, लोकेश राहुल का बल्ला खूब बोला, जडेजा ने पहली बार मैच में 10 विकेट लिए, लेकिन मैन ऑफ द मैच का खिताब करुण नायर को मिला, वहीं मैन ऑफ द सीरीज का खिताब विराट कोहली को मिला, जबकि पूरी सीरीज में अश्विन ने जादुई गेंदबाजी की थी और वह इसके प्रबल दावेदार थे. चेन्नई के हीरो करुण नायर और सीरीज का हीरो विराट को क्यों चुना गया, यहां हम बता रहे हैं…

जडेजा-नायर में मुकाबला
चेन्नई टेस्ट में मैन ऑफ द मैच के लिए दो दावेदार थे. बाएं हाथ के स्पिनर रवींद्र जडेजा ने जहां इंग्लैंड को पहली पारी में 477 रन पर समेटने में अहम भूमिका निभाई, वहीं दूसरी पारी में ड्रॉ की ओर बढ़ते मैच को अपने दम पर टीम इंडिया की झोली में डाल दिया, लेकिन खिताब ले गए करियर के पहले ही शतक को तिहरे शतक में बदलने वाले करुण नायर. वास्तव में नायर को इसलिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया, क्योंकि टीम इंडिया को पहली पारी में ऐसी बढ़त चाहिए थी, जिससे उसे दूसरी पारी में बैटिंग न करनी पड़े और नायर ने सबसे पहले लोकेश राहुल (199) के साथ 151 रनों की पारी खेली, फिर अश्विन के साथ 181 रन और रवींद्र जडेजा के साथ 138 रन जोड़े.

इस प्रकार उन्होंने न केवल 303 रन नाबाद बनाकर इतिहास रचा बल्कि टीम इंडिया को 282 रनों की निर्णायक बढ़त दिला दी. फिर क्या था इंग्लैंड टीम दबाव में आ गई और उसे मैच बचाने के लिए खेलना पड़ा, लेकिन वह दबाव नहीं झेल पाई और जडेजा की फिरकी में फंस गई. हलांकि जडेजा के प्रदर्शन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि उन्होंने मैच में पहली बार 10 विकेट लिए. फिर नायर ने मैच की दिशा तय की.

करुण नायर ऐसे पहले भारतीय रहे, जिसने अपने पहले ही शतक को तिहरे शतक में बदला, वहीं विश्व में वह सर गैरी सोबर्स (365 रन नाबाद, 1958) और बॉब सिम्पसन (311 रन, 1964) के बाद तीसरे बल्लेबाज बने, जिसने यह कारनामा किया है. टीम इंडिया की ओर से तिहरा शतक लगाने वाले वह वीरेंद्र सहवाग के बाद वह दूसरे भारतीय हैं.

विराट-अश्विन में मुकाबला
टीम इंडिया के फैन्स को उम्मीद थी कि विराट कोहली सुनील गावस्कर (774 रन) का सीरीज में सबसे अधिक रन बनाने का 45 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ देंगे, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाए, गावस्कर ने यह रिकॉर्ड 1970-71 में उस समय की धुरंधर वेस्टइंडीज के खिलाफ बनाया था. हालांकि वह पूरी सीरीज में एक दोहरे शतक के साथ सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे. उनके बल्ले से 655 रन (बेस्ट 235, 2 शतक, 2 अर्द्धशतक) निकले. मैन ऑफ द सीरीज को लेकर उनका मुकाबला टीम इंडिया के ऑफ स्पिनर आर अश्विन से रहा. अश्विन ने पूरी सीरीज में 28 विकेट और रवींद्र जडेजा ने 26 विकेट चटकाए और सीरीज जीत में अहम भूमिका निभाई. ऐसे सवाल ये कि प्लेयर ऑफ द सीरीज के लिए विराट को ही क्यों?

वास्तव में विराट कोहली को यह खिताब दिए जाने की जो वजह समझ में आती है, वह यह कि उन्होंने ऐसी परिस्थियों में रन बनाए, जिनमें बल्लेबाजी करना कतई आसान नहीं रहा. वैसे भारत के स्पिन विकेट पर बल्लेबाजी आसान नहीं होती और विराट ने टीम को कई मौकों पर संकट से निकालते हुए सुरक्षित स्थिति में पहुंचाया, जिससे गेंदबाजों का काम आसान हो गया और वह चढ़कर गेंदबाजी कर पाए.

आप सीरीज के टॉप स्कोररों पर नजर डालेंगे, तो अपने आप समझ जाएंगे कि विराट की इतनी अहमियत क्यों रही. कोहली (655) के अलावा चेतेश्वर पुजारा ही एकमात्र भारतीय बल्लेबाज रहे, जिसने सीरीज में 400 से अधिक रन बनाए हैं, वह भी कोहली से 254 रन पीछे रहे. इंग्लैंड के जो रूट ने 491 रन ठोके, लेकिन वह भी कोहली से काफी पीछे रहे. गेंदबाजी में इंग्लैंड के आदिल राशिद भी कमतर नहीं रहे और 23 विकेट लिए, जो अश्विन-जडेजा से ज्यादा कम नहीं है. ऐसे में विराट कोहली निर्विवाद पसंद रहे.