कार्बेट व अन्य नेशनल पार्कों के दस किमी दायरे में निर्माण न करने के आदेश जारी

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने वन व वन्य प्राणियों को बचाने के लिये केंद्र सरकार को निर्देश दिये है कि वह छह माह के भीतर राष्ट्रीय वन नीति की घोषणा कर वन और उसके सीमा का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिये नीति निर्धारित करे। कोर्ट ने यह भी कहा है कि रियाडोजनेरिओ में हुई यूनाईटेड नेशनल कांफ्रेंस में जो नीति वनों के लिये निर्धारित की गई है उसका अनुपालन करायें।

न्यायालय ने कार्बेट पार्क, नेशनल पार्कों व सेंचूरियों के दस किमी दायरे में ईको सेंसटिव जोन घोषित कर उसके दस किमी दायरे पर कोई भी भवन निर्माण व सड़क निर्माण नहीं करने के निर्देश दिये है। न्यायालय ने जंगली जानवरों, टाईगर, लैपर्ड व पैंथर को आदमखोर न घोषित करने के साथ-साथ यह भी निर्देश दिये है कि किसी भी मृत जानवर की फोटो इत्यादि पिं्रट व इलेक्ट्रनिक मीडिया के सामने प्रदर्शित न करने के निर्देश भी दिये है।

हाई कोर्ट ने यह भी कहा है कि वन्य जीव आदमखोर हो तो उसे आदमखोर घोषित करने से पूर्व मुख्य सचिव व कमेटी के सम्मुख मामला प्रस्तुत किया जाये। जंगली जानवरों को रेल दुर्घटना से बचाने के लिये राजाजी नेशनल पार्क के भीतर रेलवे ट्रेक पर विद्युत व्यवस्था करने के निर्देश रेलवे को दिये है साथ ही न्यायालय ने वन कानूनों में संशोधन कर शिकारियों के लिये कठोर दंड यहां तक आजीवन कारावास का प्रावाधान लाने के निर्देश भी दिये।

वनों को आग से बचाने के लिये अगले वित्तीय वर्ष में समुचित धन की व्यवस्था करने के आदेश भी दिये है। वनाग्नि को रोकने के लिये उचित मात्रा में पानी की व्यवस्था करने को भी कहा है। कोर्ट ने अतिक्रमणकारी गुजरों को वन भूमि से बेदखल करने के साथ ही वनाग्नि रोकने के लिये एसडीआरएफ व एनडीआरएफ कर्मियों की संख्या बढ़ाने को कहा है। वनाग्नि रोकने के लिये अगले वित्तीय वर्ष में दस हजार अग्निसुरक्षा कर्मचारियों को गर्मियों से पूर्व नियुक्त करने के निर्देश भी दिये है।

सरकार से इसके लिये समुचित धन की व्यवस्था करने को भी कहा है। कोर्ट ने कहा कि 24 घंटे के भीतर आग रोकने में विफल होने पर डीएफओ को तथा 48 घंटे में आग रोकने में विफल होने पर वन संरक्षक तथा 72 घंटे के भीतर आग पर काबू नहीं पाये जाने पर मुख्य वन संरक्षक को सस्पेंड करने के निर्देश दिये है। कोर्ट ने जारी आदेशों पर अमल करने के लिये मुख्य सचिव व वन सचिव को अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है। न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई।

ख़बर- यू एस सिजवाली, विधि समवाददाता, नैनीताल