नमाज के लिए 90 मिनट की छूट देने के बाद बैकफुट पर ‘सरकार’, अब सभी को अल्प अवकाश

उत्तराखंड कैबिनेट की ओर से कर्मचारियों को जुमे की नमाज के लिए 90 मिनट की छुट्टी देने के फैसले पर बीजेपी सहित विभिन्न संगठनों ने हरीश रावत सरकार पर चौतरफा हमला बोल दिया है. चौतरफा हमले का अंजाम यह हुआ कि 48 घंटे के अंदर ही सरकार सकते में आ गई. इस पर सफाई देने के लिए मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार स्वयं सामने आए हैं.

आनन-फानन में कहा गया कि सभी धर्मों के कर्मचारियों को पूजा-अर्चना के लिए अल्प अवकाश मिलेगा, लेकिन आनन-फानन में लिए गए इस फैसले पर सवाल खड़ा हो गया है. रावत सरकार के इस फैसले पर राज्य की अस्थायी राजधानी देहरादून से लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक बवाल मचा हुआ है.

17 दिसम्बर को कैबिनेट की बैठक में मुस्लिम कर्मचारियों को जुमे की नमाज के लिए 90 मिनट की छुट्टी देने का फैसला हुआ तो देहरादून से लेकर दिल्ली तक बवाल मच गया. चुनाव से ठीक पहले बीजेपी को मुद्दा मिल गया. चुनाव की पिच पर बीजेपी ने अपने हिटर उतार दिए. देहरादून से बीजेपी नेता प्रदेश सरकार पर शब्दों के बाण चला रहे हैं तो दिल्ली से भी राज्य सरकार पर जमकर हमले हो रहे हैं.

देहरादून में प्रदेश के बीजेपी नेताओं ने फैसले का विरोध किया तो दिल्ली में राष्ट्रीय प्रवक्ताओं ने मोर्चा खोल दिया. सबसे पहले बीजेपी नेता नलिन कोहली आगे आए तो बाद में दूसरे नेताओं ने कमान संभाल ली. दिल्ली में बीजेपी के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने हरीश रावत सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव से पहले यह वर्ग विशेष को खुश करने की कोशिश है. क्या अन्य धर्मों के लोगों को पूजा-अर्चना के लिए छुट्टी नहीं चाहिए.

आनन-फानन में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार सुरेंद्र कुमार की सफाई आई कि पूजा-अर्चना के लिए सभी धर्मों के सरकारी कर्मचारियों को अल्प अवकाश मिलेगा. सीएम के मीडिया सलाहकार के इस बयान पर भी सवाल खड़े हो गए हैं. सवाल खड़ा हो गया है कि अल्पकालीन अवकाश कितना व्यावहारिक है. जनता के मन में कई सवाल उठ रहे हैं.

वरिष्ठ पत्रकार रतनमणी डोभाल का कहना है कि किसी कार्यालय के सभी सरकारी कर्मचारी एक साथ पूजा-अर्चना के लिए अवकाश पर चले गए तो काम कौन करेगा. व्यापारी नेता प्रवीण कुमार का कहना है कि सरकारी कर्मचारी पूजा-इबादत के लिए तय समय से पहले कार्यालय नहीं छोड़ेंगे और बाद में नियत समय पर वापस आ जाएंगे, इसकी गारंटी कौन लेगा. हर रोज किसी न किसी धर्म की पूजा-इबादत का दिन होता है. क्या रोज कर्मचारियों को इसके लिए छुट्टी मिलेगी. जनता के इन सवालों के जवाब सरकार को खोजने हैं.

बहरहाल अंजाम कुछ भी हो लेकिन पहले मुस्लिम कर्मचारियों को नमाज के लिए 90 मिनट की छुट्टी दिए जाने का फैसला हो या बाद में उसके काउंटर के लिए सीएम के मीडिया सलाहकार की ओर से सभी कर्मचारियों को पूजा-इबादत के लिए अल्प अवकाश दिए जाने का बयान हो, दोनों का आगाज विवाद के साथ हुआ है.