मलबे और गाद से भर रही हैं नैनीताल की झीलें, गहराई नापने के आदेश

झीलों के शहर नैनीताल और आसपास स्थित अन्य झीलों की गहराई साल दर साल कम होती जा रही है. अनियोजित निर्माण व भूस्खलन का मलबा झील में जाकर झील की गहराई को कम कर रहा है. हांलाकि अब झीलों की गहराई नापने के लिए एक बार फिर कवायत शुरू हो गई है.

नैनीताल आने वाले पर्यटक यहां की सुंदर झीलों की गहराई के बारे में पूछते ही हैं. मगर अब इन झीलों की गहराई का पता लगाने की कवायत शुरू हो रही है. पिछले दिनों सिचाई विभाग की ओर से नापी गई गहराई में नैनीझील की गहराई कम आंकी गई है.

करीब 37 साल बाद नापी गई नैनी सरोवर की झील के बीचों बीच गहराई करीब 5 मीटर से ज्यादा कम होकर 18 से 20 मीटर ही रह गई है. वहीं मल्लीताल बोट स्टैंड के पास झील की गहराई 17 मीटर से घटकर 7 मीटर ही रह गई है.

ताल में गिरने वाले नालों के पास झील की गहराई लगातार कम हो रही है. झील में हो रही इस सिकुड़न के बाद डीएम नैनीताल ने नैनी सरोवर की वास्तविक गहराई का मुआयना करने को कहा है.

डीएम दीपक रावत का कहना है कि सिचाई विभाग को कहा गया है कि झीलों की गहराई नापी जाए और इन झीलों की वास्तवित गहराई का पता लगाया जाए.

गौरतबल है कि नैनी झील की गहराई का पता लगाने के लिए 1895, 1969, 1979 में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने सरोवर की गहराई मापी. उस दौरान नैनीझील की गहराई 25 मीटर मापी गई थी. इसके बाद झील में लगातार जा रही निर्माण सामाग्री व भस्खलन के मलवे के साथ मिट्टी व गाद झील में समाने लगी, तो झील की गहराई कम होती रही. इसी तरह और भी झीलों की गहराई कम हुई है.