देश के अंदर, बॉर्डर पर, समुद्र में और विदेशों में भी सुरक्षा उत्तराखंड के इन पांच वीर सपूतों के हाथ

मोर्चा चाहे जो हो उत्तराखंड के जवान दुश्मन को लोहे के चने चबवा देते हैं. उत्तराखंड के घर-घर से सेना में जवान हैं और अब प्रदेश के लिए गौरव का वह दिन भी आने वाला है जब देवभूमि का लाल देश सेनाध्यक्ष बनेगा. यही नहीं खुफिया एजेंसी रॉ प्रमुख भी अब उत्तराखंड का ही एक लाल होगा.

नए आर्मी चीफ बिपिन रावत अकेले नहीं हैं, जिन पर देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी है. इनके समेत, पहाड़ के पांच ‘पांडव’ देश की सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों के चीफ बनाए गए हैं.

सेनाध्यक्ष – बिपिन रावत
सबसे पहले बात लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत की. उत्तराखंड के पौड़ी जिले के मूल निवासी लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को देश का नया सेना अध्यक्ष बनाया गया है. मौजूदा सेना प्रमुख दलबीर सिंह 31 दिसम्बर को रिटायर हो रहे हैं. उनके बाद बिपिन रावत देश की सेना की कमान संभालेंगे. बिपिन रावत को ऊंचाई वाले इलाकों में आतंकवादी विरोधी ऑपरेशन और युद्ध में महारत हासिल है.

कश्मीर मामलों पर भी उनकी पकड़ है. शायद यही कारण है कि बिपिन रावत को उनके दो सीनियर अफसरों से ज्यादा तवज्जो दी गई है. शहादत और वीरता की धरती उत्तराखंड के लिए यह गौरव का क्षण है.

रॉ चीफ – अनिल धस्माना
उत्तराखंड के दूसरे लाल आईपीएस अफसर अनिल कुमार धस्माना को खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी रॉ का चीफ बनाया गया है. विदेश में खुफिया गतिविधियों में रॉ की अहम भूमिका रहती है.

धस्माना मूल रूप से पौड़ी जिले के रहने वाले हैं. धस्माना को बलूचिस्तान मामलों का एक्सपर्ट माना जाता है. पाकिस्तान और अफगानिस्तान मामलों पर उनकी खासी पकड़ है. वे अभी तक रॉ में नंबर दो पोजीशन पर थे और अब रॉ की कमान उनके हाथ में आई है.

पीएम मोदी खास, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल का नाम देश में हर कोई जानता है. भारतीय सेना की ओर से एलओसी के अंदर जाकर की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद तो डोभाल का नाम देश के बच्चे-बच्चे की जुबान पर है.

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में जन्मे अजीत डोभाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राइट हैंड माना जाता है. डोभाल आईबी चीफ भी रह चुके हैं. मिजोरम, पंजाब और कश्मीर में चलाए गए उग्रवाद विरोधी अभियानों में उनकी अहम भूमिका रही है. डोभाल इसी साल 30 मई से एनएसए की जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

डीजीएमओ – एके भट्ट
मसूरी के मशहूर क्रिकेट खिलाड़ी रहे एके भट्ट आज देश की सेना में डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस यानी डीजीएमओ हैं. इन्हें कुछ दिन पहले ही डीजीएमओ की जिम्मेदारी दी गई है. मूल रूप से टिहरी जिले के रहने वाले लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट का परिवार मसूरी में रहता है. डीजीएमओ बनने से पहले एके भट्ट ने लंबे समय तक गोरखा रायफल्स में सेवाएं दी हैं.

कोस्ट गार्ड डायरेक्टर जनरल – राजेंद्र सिंह
थल सेना ही नहीं बल्कि उत्तराखंड के वीर जल सेना में भी अपने जौहर दिखा रहे हैं. इसी साल 25 फरवरी को भारतीय तटरक्षक यानी कोस्ट गार्ड के डायरेक्टर जनरल के तौर पर राजेंद्र सिंह को तैनाती दी गई. राजेंद्र सिंह ने गढ़वाल विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है. उन्होंने 1980 में भारतीय तटरक्षक बल को सेवाएं देना शुरू किया था.