दून स्थित राष्ट्रपति ‘आशियाना’ में लैंड कर सकेगा एमआइ-17

बेहतरीन आबोहवा के लिए मशहूर देहरादून में द प्रेसीडेंट बॉडीगार्ड स्टेट स्थित राष्ट्रपति आवास ‘आशियाना’ में जल्द ही एमआइ-17 हेलीकॉप्टर लैंड कर सकेगा. मंडलायुक्त विनोद शर्मा ने वायुसेना और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ आशियाना के निकट हेलीपैड के लिए भूमि का स्थलीय निरीक्षण किया. माना जा रहा कि आशियाना को राष्ट्रपति का ग्रीष्मकालीन आवास बनाने की कड़ी में वहां सुविधाएं जुटाई जा रही हैं. राष्ट्रपति के अंगरक्षकों की घोड़ा गाड़ी के लिए दून में पहली बार 1938 में ग्रीष्मकालीन शिविर स्थापित किया गया. हालांकि, इससे पहले 1920 में यहां राष्ट्रपति के अंगरक्षकों के कमाडेंट का बंगला स्थापित कर दिया गया था.

आजादी के बाद करीब 175 एकड़ में फैला यह क्षेत्र द प्रेसीडेंट बॉडीगार्ड स्टेट के रूप में जाना गया. वर्ष 1975-76 में तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने ग्रीष्मकालीन दौरे के लिए दून का चुनाव किया तब कमांडेंट बंगले का जीर्णोंद्धार किया गया और नाम रखा गया आशियाना. तब से दून आगमन पर राष्ट्रपति इसी आवास में ठहरते थे. 2014 में इस विरासत को संवारने के लिए केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान की सलाह पर मई 2015 में यहां सर्वे किया गया. जीर्णोद्धार में भूकंपरोधी सरंचनाओं और पुनर्नवीकरण प्रावधानों का ध्यान रखा गया. करीब डेढ़ करोड़ की लागत से दो साल में इसे बिल्कुल नया रूप दे दिया गया. सितंबर 2016 में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उत्तराखंड यात्रा के पहले दिन इसी भवन का उद्घाटन किया. उत्तराखंड प्रवास के दौरान वह यहीं रुके.

आशियाना को जिस तरह से सजाया संवारा गया और तब वहां सचिवालय की नींव रखी गई है, उससे यही संकेत मिले कि यह राष्ट्रपति का ग्रीष्मकालीन आवास हो सकता है. अब वहां हेलीपैड के निर्माण को लेकर चल रही कसरत से इसे बल मिला है. उधर, मंडलायुक्त विनोद शर्मा ने बताया कि आशियाना के निकट भूमि का स्थलीय निरीक्षण किया जा चुका है. इसकी रिपोर्ट तैयार करने के बाद यह अग्रिम कार्यवाही के लिए भारत सरकार को भेजी जाएगी.

आशियाना को जिस तरह से सजाया संवारा गया और तब वहां सचिवालय की नींव रखी गई है, उससे यही संकेत मिले कि यह राष्ट्रपति का ग्रीष्मकालीन आवास हो सकता है. अब वहां हेलीपैड के निर्माण को लेकर चल रही कसरत से इसे बल मिला है. उधर, मंडलायुक्त विनोद शर्मा ने बताया कि आशियाना के निकट भूमि का स्थलीय निरीक्षण किया जा चुका है. इसकी रिपोर्ट तैयार करने के बाद यह अग्रिम कार्यवाही के लिए भारत सरकार को भेजी जाएगी.