पंचाचूली के जंगलों में दो हफ्ते से धधक रही है आग, खतरे में पूरा ग्लेशियर

पिथौरागढ़ जिले में पंचाचूली की तलहटी पर दो सप्ताह से लगी आग पर अब तक नियंत्रण नहीं पाया जा सका है. बल्कि अब यह ज्यादा तेजी से फैलती जा रही है. अब इस तलहटी पर तीन स्थानों पर आग लग चुकी है. यही नहीं, जंगल में लगी आग का सारा धुआं पंचाचूली की चोटियों तक पहुंच रहा है.

इससे ग्लेशियर को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है. वहीं, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव का दावा है कि आग बुझाने के लिए टीम को भेजा गया है. सूचना की सत्यता जांचने के लिए इलाके में सक्रिय एक एनजीओ की भूमिका की भी जांच की जा रही है.

पिछले कई सालों से दुर्लभ जंगली जानवरों और पक्षियों को मारने के लिए जंगलों में आग लगाई जा रही है. शिकारी आग लगाकर जंगली जानवरों को भागने के लिए मजबूर करते हैं। फिर उनको घेरकर मार देते हैं. शिकारियों के निशाने पर मुख्य तौर पर कस्तूरी मृग रहता है.

वहीं, आग से उच्च हिमालयी क्षेत्र पर उगने वाले बुरांश, खरसू, तिमसू, थुनेर के पौधों को व्यापक नुकसान पहुंच रहा है. सैकड़ों की संख्या में छोटे पौधों के जलकर नष्ट होने की सूचना है. यह इलाका तहसील मुख्यालय से काफी दूरी पर है. वहां तक पहुंचने में तीन दिन लग जाते हैं. तस्कर इसी का फायदा उठाते आ रहे हैं.

उधर, साईंभाट वन पंचायत में भी आग लगी है. वन रेंजर लवराज सिंह का कहना है कि एक बार टीम मौके तक हो आई है, लेकिन मौके पर कोई पकड़ में नहीं आया. प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव डीबीएस खाती का कहना है कि चार दिन पहले भी इसी तरह की सूचना आई थी, तो जांच कराई गई थी.

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उस वक्त पुष्टि नहीं हुई थी. बुधवार को फिर सूचना मिली है, इसके बाद डीएफओ पिथौरागढ़ को जांच के साथ गश्ती टीम भेजने को कहा गया है. पिछले साल एक एनजीओ को कथित तौर पर शिकार कराने के मामले में पकड़ा गया था. संदेह है कि यह एनजीओ भी सक्रिय हो. बहरहाल, सभी पहलू पर जांच कराई जा रही है.

राज्य पक्षी मोनाल का शिकार किए जाने की सूचनाएं मिल रही हैं. पिछले दिनों कुछ मोनाल पक्षी मारे गए थे, लेकिन स्थानीय लोगों ने इतने गंभीर मामले को रफा-दफा करवा दिया. इस समय मुनस्यारी, मदकोट सहित पूरे इलाके में अवैध शिकारी काफी सक्रिय हैं. वन विभाग और पुलिस ने इनकी तरफ आंख बंद कर रखी है.