हरिद्वार को बचाने के लिए गंगा नदी में चुगान जरूरी : मुख्यमंत्री हरीश रावत

धार्मिक नगरी हरिद्वार में खनन पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत और मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानन्द सरस्वती आमने-सामने आ गए हैं. स्वामी शिवानन्द ने केंद्र सरकार के आदेशों का हवाला देते हुए हरिद्वार कुम्भ क्षेत्र में गंगा में हो रहे खनन पर रोक लगाने की मांग की है.

उधर मुख्यमंत्री ने एक नया बयान देकर शिवानन्द को फिर से हमलावर होने का मौका दे दिया है. सीएम रावत ने सोमवार को अस्थायी राजधानी देहरादून में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि हरिद्वार को बचाने के लिए वहां पर चुगान जरूरी है.

मातृसदन के संतों की ओर से खनन के खिलाफ कई आंदोलन किए जा चुके हैं. हाल ही में मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानन्द सरस्वती ने खनन बंदी की मांग को लेकर तप किया था. स्वामी शिवानन्द का कहना है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत और तत्कालीन मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने उनके आश्रम में आकर आश्वासन दिया था कि रायवाला से लेकर भोगपुर तक खनन बंदी का शासनादेश जारी किया जाएगा. लेकिन दोनों ही अपने वादे से मुकर गए. स्वामी शिवानन्द ने सीएम पर खनन माफिया को शह देने का आरोप भी लगाया.

स्वामी शिवानन्द का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से गंगा से पांच किलोमीटर के दायरे में खनन सामग्री के क्रशिंग पर रोक लगा दी गई है, लेकिन राज्य सरकार केंद्र के आदेश की अवहेलना करते हुए इस दायरे में आए स्टोन क्रशरों को बंद नहीं करा रही है.

सोमवार को देहरादून में पत्रकारों ने सीएम हरीश रावत से खनन बंदी पर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि चुगान नीति को सरकार मंजूरी दे चुकी है. पौकलैंड जैसी मशीनों से खनन नहीं हो, इस पर नजर रखी जा रही है, लेकिन चुगान बंदी नहीं की जा सकती है. हरिद्वार को बाढ़ जैसे खतरे से बचाने के लिए वहां पर चुगान जरूरी है.