विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का एम्स में किडनी ट्रांसप्लांट किया गया, हालत स्थिर

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का शनिवार (आज) एम्स में ‘सफलतापूर्वक’ किडनी प्रतिरोपण हुआ. डॉक्टरों की टीम ने करीब छह घंटे तक सर्जरी की, जिसके बाद उन्हें गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में स्थानांतरित कर दिया गया. एम्स के सूत्रों ने कहा कि सुषमा को लगभग 40 वर्ष उम्र की एक महिला ने किडनी दान दी और वह विदेश मंत्री की रिश्तेदार नहीं हैं. डॉक्टरों की टीम मंत्री की हालत की चौबीसों घंटे निगरानी कर रही है.

एम्स के निदेशक डॉ एमसी मिश्रा ने बताया, ‘सर्जरी सफल रही. उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है और हालत स्थिर है. डॉक्टरों की एक टीम उनकी निगरानी कर रही है. दानकर्ता ने स्वेच्छा से मंत्री को अपनी किडनी दान दी है.’ सूत्रों ने बताया कि चूंकि उनके परिवार में कोई उपयुक्त दानकर्ता नहीं मिला, इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति की किडनी लेनी पड़ी. उन्होंने कहा कि इसके लिए एम्स के प्राधिकार समिति से मंजूरी ली गई.

मिश्रा ने कहा कि सर्जरी कार्डियो थोरासिस केंद्र के 50 डॉक्टरों की टीम ने किया, जिनमें प्रतिरोपण सर्जन, प्रतिरोपण एनेस्थेलॉजिस्ट, नर्स, टेक्नीशियन और अन्य सहयोगी कर्मचारी थे.

इस टीम में एमसी मिश्रा, सर्जन वीके बंसल और वी सीनू, नेफ्रोलॉजिस्ट संदीप महाजन और कार्डियो थोरासिस एवं वास्कुलर सर्जरी के प्रमुख डॉ. बलराम ऐरन एवं अन्य शामिल थे.

सूत्रों के अनुसार, ‘प्रक्रिया से पहले प्राधिकरण समिति से मंजूरी ली गई.’ डॉक्टरों ने कहा कि 64 साल की सुषमा लंबे समय से मधुमेह से पीड़ित रही हैं. एक जांच के दौरान उनके गुर्दों के काम नहीं करने का पता चला था. इसके बाद से वह डायलिसिस पर थीं.

एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा, ‘उनकी हफ्ते में तीन बार डायलिसिस हो रही थी.’ सुषमा स्वराज ने गत 16 नवंबर को ट्विटर पर लिखा था कि उनके गुर्दे ने काम करना बंद कर दिया है, इसलिए वह एम्स में भर्ती हैं.

उन्होंने ट्वीट किया था, ‘मेरे गुर्दे ने काम करना बंद कर दिया है, इसलिए मैं एम्स में भर्ती हूं. इस समय मेरी डायलिसिस चल रही है. गुर्दे के प्रतिरोपण के लिए मेरी स्वास्थ्य जांच की जा रही है. भगवान कृष्ण की कृपा मुझपर बनी रहे.’ उन्हें 7 नवंबर को एम्स में भर्ती किया गया था.

विदेश मंत्री के अपने स्वास्थ्य की जानकारी देने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हुए संदेश दिए और बहुत सारे लोगों ने प्रतिरोपण के लिए अपना गुर्दा देने की भी पेशकश की. इससे पहले इस साल अप्रैल में निमोनिया एवं दूसरी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए उन्हें एम्स में भर्ती किया गया था.