मुख्यमंत्री ने नोटबंदी के बाद 50 लाख से ज्यादा के संपत्ति सौदों की जांच के आदेश

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नोटबंदी की जानकारी कुछ लोगों को पहले से होने की आशंका जाहिर करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शुक्रवार को आठ नवंबर के बाद राज्य में हुए 50 लाख रुपये से अधिक मूल्य के भूमि और संपत्ति सौदों की जांच के आदेश दे दिए हैं.

अस्थायी राजधानी देहरादून में एक संवाददाता सम्मेलन में रावत ने कहा, ‘मैंने आदेश दिए हैं कि आठ नवंबर को नोटबंदी के बाद राज्य में हुए 50 लाख रुपये मूल्य से अधिक के जमीन और संपत्ति सौदों की जांच की जाए और यह देखा जाए कि ये सौदे उचित हैं या नहीं.’

उन्होंने बताया कि आठ नवंबर के बाद से राज्य में 50 लाख रुपये मूल्य से अधिक के कुल 108 भूमि और संपत्ति सौदे हुए हैं, जिनमें से अकेले देहरादून में ही 72 सौदे हुए हैं. मुख्यमंत्री ने बताया कि इन सौदों की जांच राज्य सरकार की अपनी एजेंसियां करेंगी. हालांकि, इन सौदों की जांच की समयसीमा के बारे में उन्होंने खुलासा नहीं किया.

सौदों की जांच की जरूरत के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें संदेह है कि कुछ लोगों को नोटबंदी के कदम के बारे में जानकारी रही होगी और इसी के चलते उन्होंने भूमि और संपत्ति की खरीदारी की होगी.

हालांकि, एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि नोटबंदी के बाद से संपत्ति के पंजीकरण में 32 प्रतिशत की कमी आयी है, जबकि इस पर लगने वाले शुल्क में 35 प्रतिशत गिरावट आयी है.

उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद खनन विभाग के राजस्व में 21 प्रतिशत की कमी आयी है, जबकि राज्य सरकार के उपक्रम मंडी परिषद में भी तिलहन को छोड़कर बाकी चीजों का उठान प्रभावित हुआ है.

राज्य सरकार के दो अन्य उपक्रमों, गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) और कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) के भी अपने नवंबर के टर्नओवर में 18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज करने की बात कहते हुए रावत ने कहा कि इससे उनकी यह आशंका सही साबित हुई है कि नोटबंदी से राज्य की अर्थव्यवस्था को 500-700 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा है.

नोटबंदी को लेकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के सवालों को केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा द्वारा जवाब के लायक न होने की बात कहे जाने पर संवाददाताअें के प्रतिक्रिया मांगने पर मुख्यमंत्री रावत ने उस पर टिप्प्णी करने से इनकार करते हुए कहा कि बीजेपी का स्वरूप ही ऐसा है कि उसके नेता अपने राजनीतिक विरोधियों का सम्मान नहीं करना चाहते.

उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी एक राजनीतिक दल के उपाध्यक्ष हैं और एक महत्वपूर्ण नेता हैं। आप उनकी बात से सहमत हों या असहमत, उनके जवाब तो देने ही चाहिए.’ नोटबंदी के कारण आम लोगों की तकलीफ का जिक्र करते हुए हरीश रावत ने कहा कि केंद्र सरकार एक ऐसी स्थिति में फंस गई है, जिससे निकलने का उसे समाधान नहीं नजर आ रहा है और अब वह कालेधन को खत्म करने की बात से हटकर कैशलेस लेनदेन की बात करने लगी है.

नोटबंदी के फैसले को ‘सुविचारित की बजाय प्रतिक्रियात्मक कदम’ बताते हुए मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि केवल नौ फीसदी की इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले देश में कैशलेस के विकल्प को इतनी जल्दी कैसे अपनाया जा सकता है. अगर समय रहते उपाय न किए गए तो इसके परिणाम घातक हो सकते हैं.

केंद्र सरकार द्वारा नोटबंदी से आतंकवाद की कमर तोड़ने संबंधी प्रचार को भी गलत बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर नजदीकी निगाह रखने वालों का मानना है कि आतंकवाद के लिए डॉलर और पौंड जैसी मुद्रा का ज्यादा इस्तेमाल होता है और इसमें हमारी मुद्रा इस्तेमाल नहीं होती.

रावत ने केंद्र सरकार के मंत्रियों द्वारा उत्तराखंड आकर राज्य को केंद्र द्वारा धन की गंगा बहाए जाने और राज्य सरकार द्वारा काम न किए जाने की बात को गलत बताया और कहा कि केंद्रीय मंत्री राजनीति कर रहे हैं जिस पर उन्हें सख्त ऐतराज है.

उन्होंने कहा कि केंद्र से राज्य को स्पेशल प्लान कंपोनेंट, 13वें वित्त आयोग और अन्य केंद्रीय योजनाओं के तहत 2254 करोड़ रुपये के सापेक्ष अब तक 905 करोड रुपये ही प्राप्त हुए हैं, जबकि राज्य सरकार अपने संसाधनों से उन पर अब तक 1400 रुपये खर्च कर चुकी है.

उन्होंने कहा कि इसी तरह अनुसूचित जाति और जनजाति छात्रवृत्ति में भी राज्य सरकार को स्वीकृत 160 करोड रुपये के मुकाबले 75 करोड रुपये ही मिले हैं. ऐसी ही स्थिति ज्यादातर योजनाओं की है.