नोटबंदी पर राहुल गांधी बोले, जब मैं बोलूंगा तो भूकंप आ जाएगा

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि सरकार के नोटबंदी पर फैसले को चुनौती देने वाला उनका भाषण तैयार है लेकिन संसद में उन्हें बोलने से रोका जा रहा है. गांधी ने कहा ‘अगर मुझे संसद में बोलने दिया गया तो भूकंप आ जाएगा.’ उधर भाजपा ने राहुल के इस बयान पर तंज कसते हुए कहा है कि जो 60 साल से घोटालों का केंद्र बने हुए थे, वो आज भूकंप की बात कर रहे हैं.

गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद देश भर में लोगों को हो रही परेशानी को लेकर कांग्रेस ने सबसे ज्यादा इस फैसले का विरोध किया है. संसद के शीतकालीन सत्र को अब खत्म होने में चार ही दिन बचे हैं, ऐसे में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही नोटबंदी को लेकर बिना किसी सफलता के बहस जारी रखे हुए हैं. इस वजह से बार बार संसद की कार्यवाही स्थगित भी हो रही है. विपक्ष चाहती है कि इस मुद्दे पर बहस होने के बाद वोट किया जाए जिसे सरकार स्वीकार नहीं कर रही है. हालांकि शुक्रवार को सुबह विपक्ष ने अपनी पिछली मांग को किनारे रखा जिसमें वह ज़ोर दे रही थी कि बहस के बाद वोट किया जाए. अब बीच का रास्ता निकाला गया है जिसमें ‘नो रूल’ चर्चा को स्वीकार किया गया है जिसके तहत स्पीकर सुमित्रा महाजन यह तय करेंगी कि निर्बाध चल रही चर्चा के बाद वोट करवाया जाए या नहीं.

वैंकेया नायडू ने भी विपक्ष की नोटबंदी पर वोटिंग की मांग को खारिज करते हुए कहा कि ‘चुनाव तो 2014 (लोकसभा) और टाइम मैगेज़ीन में हो चुके हैं.’ बता दें कि संसद में कई विधेयक नोटबंदी पर हंगामे की वजह से अधर में लटके हुए हैं. जीएसटी भी ऐसा ही एक मामला है, सरकार इसे अप्रैल से शुरू करना चाहती है जिसके लिए कई प्रस्तावों को संसद के इस सत्र में मंजूरी की जरूरत है. लेकिन नोटबंदी के फैसले के बाद विपक्ष के लहज़े में रूखापन आ गया है और कुछ पार्टियां तो भारत के सबसे बड़े टैक्स सुधार माने जाने वाले जीएसटी से हाथ खींचने पर विचार कर रही हैं.

विपक्ष ने भी नोटबंदी पर अपना रुख थोड़ा बदला है. जहां पहले पीएम से संसद में आकर सफाई देने की मांग की जा रही थी, वहीं अब कहा जा रहा है कि वह संसद में आकर माफी मांगे. वित्तमंत्री ने कहा है कि सरकार जवाब देने के लिए तैयार है लेकिन विपक्ष ही कार्यवाही में बार बार बाधा डाल रही है.इससे पहले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी विपक्ष पर नाराज़गी जताते हुए कहा था कि ‘भगवान के लिए अपना काम कीजिए.’ उन्होंने कहा कि विरोध करने के लिए सड़कें है न कि संसद.