हाईकोर्ट हुआ सख्त, ‘पूर्व मुख्यमंत्रियों से 15 फरवरी तक खाली कराएं बंगले वरना बल प्रयोग करेंगे’

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवंटित बंगलों को खाली करने के लिए 15 फरवरी की समयसीमा तय करते हुए चेतावनी दी कि अगर वे इसका पालन करने में विफल रहे तो भवनों को खाली कराने के लिए बल प्रयोग सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी.

याचिकाकर्ता के वकील कार्तिकेय हरि गुप्ता ने बताया कि ज्यादातर मुख्यमंत्रियों द्वारा अब तक आवंटित बंगले खाली करने से बचने पर गंभीर रुख अख्तियार करते हुए हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और वीके बिष्ट की एक खंडपीठ ने उन्हें 14 दिसंबर तक अदालत में यह हलफनामा दायर करने का भी आदेश दिया है कि वे 15 फरवरी तक भवनों को खाली कर देंगे.

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर पूर्व मुख्यमंत्री तय की गयी इस नयी समयसीमा का पालन करने में विफल रहते हैं तो अदालत आवंटित बंगलों को खाली कराने के लिये बलपूर्वक खाली कराने सहित कठोर आदेश पारित करेगा.

इससे पहले, अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को उन्हें आवंटित बंगलों को 31 जनवरी तक खाली कर देने को कहा था. हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा अपने वकीलों के जरिए बंगले खाली करने की समयसीमा बढ़ाए जाने का आग्रह करने के बाद अदालत ने अपने आदेश को संशोधित किया है.

अदालत के पूर्व आदेश के अनुसार अब तक केवल पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने अपना बंगला खाली किया है, जबकि अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों नारायणदत्त तिवारी, रमेश पोखरियाल निशंक, भुवन चंद्र खंडूरी तथा विजय बहुगुणा ने अभी तक अपने भवन खाली नहीं किए हैं.

हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को भी 14 दिसंबर तक यह हलफनामा दाखिल करने को कहा है कि उसकी पूर्व मुख्यमंत्रियों से किराए के रूप में कितनी धनराशि वसूल करने की योजना है.