रुद्रप्रयाग और चमोली में पारंपरिक पांडव नृत्यों की धूम, बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे लोग

वैसे तो देवभूमि उत्तराखंड का हर गांव धार्मिक संस्कृत और आस्था से परिपूर्ण हैं. यहां कदम-कदम पर देवी-देवताओं के मंदिर मौजूद हैं. इसी परंपरा में रुद्रप्रयाग व चमोली जिलों में इन दिनों पांडव नृत्यों की धूम मची हुई है.

हर गांव में पांडव नृत्य व महाभारत के ऐतिहासिक अध्याय चक्रव्यूह को लेकर नाटिकाओं का आयोजन किया जा रहा है. इन आयोजनों में ग्रामीणों भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. यहां के कई गांवों ने तो दशकों से इस परंपरा को जिंदा रखा है। ऐसा ही एक नारी गांव भी है, जिसने पिछले 30 वर्षों से इस परंपरा को जीवंत रखा गया और इस तरह के सामूहिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

चक्रव्यूह में पांडव का वह मंचन होता है, जिसमें सत्य पर असत्य की जीत का वर्णन दर्शया जाता है. इस मंचन में कोरवों द्वारा छल-कपट कर वीर अभिमन्यु को वीरगति प्राप्त होती है, जिससे वहां मौजूद सैंकड़ों दर्शकों की आंखें नम हो जाती हैं.