विश्व एड्स दिवस: आयुर्वेद से दूर होगा एड्स, ऐसे करे उपचार

एड्स ऐसी बीमारी है, जिसका नाम सुनते ही शरीर में हलचल होने लगती है. लेकिन यदि किसी को एड्स हो जाये तो इससे घबराने की जरूरत नहीं है. समय पर और सही इलाज से एड्स पीड़ित व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ मिल सकता है. भारत की प्राचीन चिकित्सा पैथी आयुर्वेद में खास ढंग से एडस का इलाज किया जाता है. एड्स पीड़ित व्यक्ति में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है. आयुर्वेद में इस स्थिति को ओज क्षय कहा गया है. ओज क्षय का उपचार करने के लिए आयुर्वेद के मुताबिक औषधियां तैयार की जाती हैं.

पतंजलि हरिद्वार में आयुर्वेद चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष वैद्य अरुण कुमार पांडेय ने बताया कि आचार्य बालकृष्ण की देखरेख में एड्स रोगियों का इलाज किया जा रहा है. एड्स रोगी की जांच के बाद देखा जाता है कि उसमें वायरस की क्या स्थिति है और रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट किस गति से और कितनी हो चुकी है. इसके बाद ओज क्षय का उपचार शुरू किया जाता है.

वैद्य अरुण कुमार पांडेय ने बताया कि एडस पीड़ितों को खास तरह से उगाई गई औषधियों से तैयार आयुर्वेदिक कैप्सुल्स देकर उपचार किया जाता है. हर तीन माह बाद रोगी की जांच कर इलाज में बदलाव किया जाता है.

एड्स की बीमारी को लेकर उत्तराखंड आयुष विभाग में कार्यरत आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. मनी झा का कहना है कि शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता से लड़ने की कमी को आयुर्वेद में ओज क्षय कहा जाता है. आयुर्वेद के मुताबिक मानव शरीर सात धातुओं से बना हुआ है. एक भी धातु की कमी होने से मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है. शरीर में अस्थि, मज्जा और शुक्र के पूर्ण रूप से होने से मानव शरीर एड्स जैसे रोग से लड़ सकता है. शरीर धातु का निर्माण हमारे खानपान और रहन सहन पर आधारित होता है. इसलिए हमें अपने खान पान पर भी ध्यान रखना चाहिए.

आयुर्वेद में ओजवर्धक दवाइयों का प्रयोग होता है. यें दवाइयां संबंधित व्यक्ति की आयु और रोग के चरण पर निर्भर करती है. दवाइयों का असर व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर होता है. आयुर्वेद रसायन द्रव्यों द्वारा ओज क्षय का उपचार हो सकता है. आयुर्वेद में ओज क्षय का विस्तार से वर्णन मिलता है.

डॉ. झा के मुताबिक एड्स पीड़ित व्यक्ति को अमृता सत्व, सतावरी मूल चूर्ण, कपिकच्चु चूर्ण, रुदन्ति चूर्ण आदि से लाभ मिलता है. इसके अलावा स्वर्ण भस्म, रौप्य भस्म और यसद भस्म आदि का उपयोग एड्स के रोगी के लिए लाभप्रद हो सकता है. इनसे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और शरीर रोगों से लड़ने के लिए तैयार हो जाता है.