हरिद्वार : गंगा मैया के लिए आज से जल भी छोड़ देंगे स्वामी शिवानंद सरस्वती

हरिद्वार स्थित मातृसदन आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती शुक्रवार से जल का परित्याग करेंगे. उन्होंने कहा कि एक सप्ताह तक राष्ट्रपति और न्यायाधीशों ने उनके पत्र का जवाब नहीं दिया, जिसके चलते वह अब अपनी संयम रूपी तपस्या को धीरे-धीरे और कठोर करेंगे. उधर, स्वामी शिवानंद ने जांच के लिए पहुंची ऋषिकुल परिसर की डॉक्टरों की टीम को बिना जांच के ही लौटा दिया.

जगजीतपुर स्थित मातृसदन आश्रम में पत्रकारों से वार्ता में स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि संतों का जीवन किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए होता है. उन्होंने कहा कि साल 1992 से वे गंगा में अवैध खनन को बंद करने की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन उसके बावजूद गंगा में अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है. कहा कि कई बार अनशन और तपस्या करने के बाद भी प्रशासन, शासन और राज्य सरकार अवैध खनन पर रोक पाने में असमर्थ रही हैं.

उन्होंने कहा, इस बारे में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल सहित मुख्य न्यायाधीश से इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई थी, लेकिन उनमें से किसी का कोई जवाब नहीं आया है. कहा कि जवाब नहीं आने का मतलब उन लोगों की इसमें मौन स्वीकृति है. लिहाजा वे शुक्रवार से उग्र तप शुरू कर जल का परित्याग करेंगे.

स्वामी शिवानंद ने कहा कि वे अभी तक संयम तप कर रहे थे, लेकिन अब मजबूरन उन्होंने पंचतत्वों से बने शरीर को परमात्मा में विलीन करने का फैसला लिया है. कहा कि शुक्रवार सुबह छह बजे तक कोई जवाब नहीं पहुंचा तो वे उग्र तप करेंगे.