श्रीनगर पहुंचे CM हरीश रावत ने मां धारीदेवी से मांगी माफी, लेकिन क्यों…

उत्तराखंड में पौड़ी जिले के श्रीनगर से करीब 15 किलोमीटर दूर धारीदेवी मंदिर शक्तिपीठ पहुंचे मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मां धारीदेवी के दर्शनों के दौरान कान पकड़कर मां धारीदेवी से माफी मांगी.

उन्होंने श्रीनगर जल विद्युत परियोजना बांध की ऊंचाई 100 मीटर बढ़ाकर धारीदेवी के मूल स्थान को डुबोने को राज्य की ऐतिहासिक भूल बताई और गलती स्वीकार करते हुए मां धारीदेवी से कान पकड़कर माफी मांगी.

गौरतलब है कि साल 2013 में केदारनाथ और पूरे राज्य में भीषण आपदा में हजारों लोगों के जानो-माल की क्षति के पीछे मां धारीदेवी को एक दिन पूर्व अपने मूल स्थान से बिना विधि-विधान से हटाने को एक कारण माना जाता रहा है. इस घटना को ध्यान में रखते हुए ही मां धारीदेवी से मुख्यमंत्री हरीश रावत की क्षमा याचना को देखा जा रहा है.

धारीदेवी मंदिर में कैबिनेट मंत्री और देवप्रयाग विधायक मंत्री प्रसाद नैथानी के साथ पहुंचे मुख्यमंत्री हरीश रावत पूजा-अर्चना के दौरान भावुक हो गए और मां धारी की प्रतिमा को देखते हुए कान पकड़कर क्षमा याचना की. उन्होंने कहा कि क्या करें हमसे गलती हुई है और बांध की ऊंचाई बढ़ने से मां धारी को मूल स्थान से हटाकर जो गलती हुई है उसके लिए मां धारी से क्षमाप्रार्थी हूं और मां से कामना है कि वो क्षेत्र में शांति और खुशहाली लाए.

मंदिर में दर्शनों के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि परियोजना से लोगों के सामने दिक्कतें आयी हैं. उन्होंने कहा कि चाहे धारीगांव, चौरास या डुंगरीपंथ के लोगों की समस्याएं हों या फिर मंदिर के स्थायी निर्माण की बात हो, हम कोशिश कर रहे हैं कि परियोजना संस्था जीवीके सहयोग करे, यदि नहीं भी करेगी तो हम अपने स्तर से उसे करवाएंगे.

उन्होंने चौरास में बदहाल सड़कों का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि जीवीके उन्हें नहीं बनाती तो हम राज्य सैक्टर के माध्यम से कम से कम मुख्य सड़क का निर्माण तो करवाएंगे ही, साथ ही पुल का भी मामला है. उन्होंने धारीदेवी मंदिर के स्थायी निर्माण कार्य की धीमे निर्माणकार्य की भी बात कहते हुए इसका संज्ञान लिए जाने की बात कही.

धारीदेवी मंदिर से कीर्तिनगर पहुंचे मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नवसृजित कीर्तिनगर तहसील का उद्घाटन करने के साथ 10 करोड़ रुपये लागत की विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया. उन्होंने कीर्तिनगर तहसील से विभिन्न जनहितकारी योजनाओं के तहत प्रमाणपत्र दिए जाने की लैपटॉप पर बटन दबाकर शुरुआत की और तहसील भवन का निरीक्षण भी किया.

मुख्यमंत्री हरीश रावत इसके बाद रामलीला मैदान कीर्तिनगर पहुंचे, जहां उन्होंने जनता के बीच जाकर उनका अभिवादन किया और लोगों से मुलाकात की. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कैबिनेट मंत्री और देवप्रयाग विधायक मंत्री प्रसाद नैथानी और घनसाली के पूर्व विधायक भीमलाल आर्य की मौजूदगी में जनसभा को भी सम्बोधित किया.

बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पर पैसा न होने के बावजूद अंधाधुंध घोषणाओं के आरोपों पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि मैंने पूर्व मुख्यमंत्रियों की घोषणाओं को भी पूरा किया है और उनसे ढाई गुना ज्यादा घोषणाओं को करने के बावजूद 70 प्रतिशत घोषणाओं को अमल में ले आया हूं.

उन्होंने कहा कि देश में किसी मुख्यमंत्री की ओर से अपनी घोषणाओं को पूरा किए जाने का ये रिकॉर्ड है. सीएम ने राज्य में आपदा प्रभावित गांवों के विस्थापन को बड़ा सवाल बताते हुए कहा कि केन्द्र सरकार से राज्य सरकार ने तराई क्षेत्र में सुरक्षित भूमि देने की मांग की है.

उन्होंने कहा कि केन्द्र जब तक मदद नहीं करेगा, राज्य कुछ नहीं कर सकता. उन्होंने कहा, जो परिवारों और व्यक्तियों का विस्थापन था या घर बनाने का था वो ऐतिहासिक काम हमने पूरा कर लिया है. उन्होंने बताया कि 3000 लोगों के घर या तो बना लिए गए हैं या फिर घर बनाने में उनकी मदद कर दी गई है, लेकिन गांवों के विस्थापन का सवाल बड़ा मुद्दा है.