देहरादून में रची गई थी नाभा जेल से आतंकियों-अपराधियों को भगाने की साजिश

पंजाब के पटियाला में नाभा जेल ब्रेक की साजिश उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून में रची गई थी. रविवार उत्तर प्रदेश के शामली जिले में गिरफ्तार परमिंदर उर्फ गुरविंदर उर्फ पैंदा देहरादून में पिछले छह महीने से रायपुर थाना क्षेत्र के डांडा लखौंड में किराए के मकान में शरण लिए हुए था.

नाभा जेल ब्रेक से पांच दिन पहले वह यहां से पंजाब के लिए रवाना हुआ था. पैंदा को देहरादून में शरण देने वाले शख्स की पत्नी और उसके नौकर को दून पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. इन दोनों से पूछताछ के लिए पंजाब व यूपी पुलिस के साथ सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी भी पहुंच गए हैं.

पंजाब की नाभा जेल से खालिस्तान लिब्रेशन फ्रंट के प्रमुख हरमिंदर सिंह उर्फ मिंटू व उसके चार साथियों को भगाने में परमिंदर उर्फ पैंदा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उत्तर प्रदेश के शामली जिले में पैंदा के गिरफ्तार होने के बाद हरकत आई यूपी व पंजाब पुलिस के तीन अधिकारी सोमवार सुबह देहरादून पहुंच गए.

यहां पुलिस टीम ने रायपुर के डांडा लखौंड में सिद्धार्थ लॉ कॉलेज के पास किराए के मकान में रह रहे सुनील पुत्र सुदर्शन अरोड़ा के घर पर छापा मारा. एसएसपी देहरादून डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि सुनील ने ही परिमंदर को देहरादून में पिछले छह महीने से शरण दे रखी थी.

सुनील तो घर पर नहीं मिला, लेकिन उसकी पत्नी गीता व उसका नौकर आदित्य व उर्फ बिन्नी पुत्र राकेश मेहरा मूल निवासी 179 रेलवे कॉलोनी लुधियाना पंजाब को गिरफ्तार कर लिया गया.

मकान की तलाशी में दो लाख रुपये की नकदी के अलावा हथियार व बम बनाने का सामान भारी मात्रा में मिला. जिसमें एक प्लास्टिक के डिब्बे में 7.62 एमएम की 10 गोलियां, ड्राई सेल, लोहे की गोलियां, कई मोबाइल फोन, लोहे की रॉड, शस्त्रों की सफाई कर सामान, पेचकश, प्लास, इलेक्ट्रानिक कॉम्पैक्ट स्केल (वजन मापने के लिए) व ग्रीस आदि भी बरामद हुआ.

इसके अलावा गाड़ियों पर लगने वाले सादे नंबर प्लेट, भारतीय निर्वाचन आयोग का बिना प्रिंट किया हुआ सादा वोटर आइडी कार्ड व 123 बिना प्रिंट आधार कार्ड भी मिले हैं.

मार्च 2014 में पंजाब की नाभा जेल से फरार होने के बाद तकरीबन छह महीने पहले देहरादून पहुंचा परमिंदर उर्फ पैंदा ने सुनील के घर पर शरण ली. दरअसल सुनील लुधियाना के चर्चित शिवानी मर्डर केस में नाभा जेल में बंद था. यहीं पर पैंदा और सुनील की मुलाकात दोस्ती में बदल गई.

खालिस्तानी आतंकी हरमिंदर उर्फ मिंटू भी नाभा जेल में ही था, जहां तीनों की दोस्ती हुई. नाभा जेल के अस्पताल से फरार होने के दौरान इन दोनों ने मिंटू को जेल से भगाने का वादा किया था.

पैंदा देहरादून के डांडा लखौंड में रईसों के तरह रहता था. उसके पास लग्जरी गाड़ियां थीं और मकान में सुख-सुविधा के सारे साधन मौजूद थे. जबकि पैंदा और सुनील दोनों के पास आय का कोई निजी जरिया नहीं है. इसके बाद भी दो लाख रुपये की नकदी और तीन अन्य बैंक खातों में जमा लाखों रुपये के स्रोत ने खुफिया एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं. पंजाब और यूपी पुलिस की टीम के साथ बैंक खातों में आने वाले धन की जांच कर रही है.

परमिंदर उर्फ पैंदा ने जेल ब्रेक की फूलप्रूफ योजना बनाने के साथ देश से बाहर जाने की भी तैयारी कर रखी थी. पैंदा को शरण देने वालों से हुई पूछताछ में यह बात भी सामने आई है. नाभा जेल से फरार होने के बाद आतंकी पहले देहरादून आते, यहां सुनील के मकान में एक-दो दिन रुकने के बाद इन अपराधियों की मौका देख बाजपुर के रास्ते नेपाल फरार होने की योजना थी.