नोटबंदी के खिलाफ ‘भारत बंद’ या सिर्फ ‘विरोध प्रदर्शन’ पर बंटा विपक्ष

नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बंद करने के फैसले के बाद विपक्षी पार्टियों के बीच दुर्लभ एकता देखने को मिली है, लेकिन सोमवार को नोटबंदी के मुद्दे पर विरोध जताने के तौर-तरीकों को लेकर उनमें मतभेद उभर आए हैं.

माकपा और भाकपा सहित वामपंथी पार्टियों ने नोटबंदी के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए पश्चिम बंगाल में 12 घंटे के बंद का आह्वान किया है, जबकि ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस इस बंद में शामिल नहीं होगी और सिर्फ विरोध प्रदर्शन करेगी.

कांग्रेस ने भी बंद से खुद को अलग कर लिया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस ने किसी ‘भारत बंद’ का आह्वान नहीं किया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ‘जन आक्रोश दिवस’ के तौर पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगी.

जेडीयू ने विपक्षी पार्टियों की ओर से किए जाने वाले विरोध प्रदर्शन और 30 नवंबर को पटना में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दिए जाने वाले धरने में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है. जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नोटबंदी का स्वागत किया है.

जेडीयू की बिहार इकाई के अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा, ‘हमने नोटबंदी के केंद्र के फैसले का समर्थन किया है. हम नोटबंदी का विरोध कैसे कर सकते हैं या बंद जैसी गतिविधि का हिस्सा कैसे बन सकते हैं जिसका मकसद एक ऐसे मुद्दे पर विरोध दर्ज कराना है, जिसका हमारी पार्टी पुरजोर समर्थन करती है.’

पार्टी महासचिव केसी त्यागी ने कहा, ‘जेडीयू 30 नवंबर को पटना में ममता बनर्जी के धरना सहित नोटबंदी के खिलाफ किसी भी प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेगी.’ त्यागी ने कहा, ‘हमने नोटबंदी के पक्ष में एक वैचारिक रुख अपनाया है, लिहाजा हम ऐसे प्रदर्शन का हिस्सा कैसे बन सकते हैं जो इसे वापस लेने की मांग कर रहा हो.’

ओड़िशा में सत्ताधारी बीजू जनता दल (बीजद) भी विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा नहीं लेगा. पार्टी के प्रमुख और राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने नोटबंदी के फैसले का समर्थन किया है.