दुनियाभर में 55 यूनेस्को संरक्षित धरोहरें पहुंचीं विनाश के कगार पर

वैसे तो दुनियाभर में यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन) संरक्षित 1052 विश्व धरोहर हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सभी के संरक्षण का अकेला जिम्मा इसी संगठन का है. क्योंकि ये धरोहर विश्व के 163 देशों में स्थापित हैं और भौतिक रूप से इनके संरक्षण की जिम्मेदारी सीधे तौर पर इन्हीं देशों की है.

गंभीर बात यह है कि तमाम देश अपने यहां की विश्व धरोहरों के प्रति गंभीर नजर नहीं आ रहे. फलस्वरूप दुनिया में 55 विश्व धरोहर विनाश के कगार पर पहुंच गए हैं. यह बात यूनेस्को कैटेगरी-दो केंद्रों की देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान में आयोजित वार्षिक बैठक में निदेशक (विश्व धरोहर) एम. रोसलर ने बतायी. उन्होंने बताया कि यूनेस्को को विश्व धरोहरों की अनदेखी की करीब 100 शिकायतें रोज मिल रही हैं.

यूनेस्को निदेशक एम. रोसलर ने कहा कि संगठन अकेले अपने दम पर विश्व धरोहरों का संरक्षण करने में कामयाब नहीं हो सकता. यूनेस्को सिर्फ तकनीक, वित्तीय आदि की मदद ही मुहैया करा सकता है. इससे आगे भौतिक रूप से संबंधित देशों और वहां के नागरिकों को ही इन अनमोल धरोहरों के संरक्षण का प्रयास करना होगा.

विश्व धरोहरों का निर्माण दोबारा संभव नहीं, इनका संरक्षण करके ही इन्हें सदियों तक महफूज रखा जा सकता है. उन्होंने उदाहरण दिया कि विश्व युद्ध प्रथम व द्वितीय के स्मारकों से वहां के लोगों का कोई लेना-देना नजर नहीं आता.

भारत में विश्व धरोहरों के प्रति अनदेखी पर यूनेस्को निदेशक ने कहा कि यहां लोग विश्व धरोहरों का भ्रमण उसकी महत्ता से अधिक पिकनिक स्पॉट के रूप में कर रहे हैं. इसके चलते इन्हें निरंतर नुकसान पहुंच रहा हैं.

इन देशों में धरोहरों को पहुंचा ज्यादा नुकसान
सीरिया – 06
कांगो – 05
लीबिया – 05
इराक – 03
माली – 03
अफगानिस्तान – 03

विश्व धरोहरों की मौजूदा स्थिति
कुल संख्या – 1052
प्राकृतिक – 203
सांस्कृतिक – 814
देशों में साझा – 34
भारत में कुल धरोहर – 35