आज से शुरू हो रहा है उत्तराखंड रंगमंच का शताब्दी नाट्योत्सव, ‘इसलिए’ है खास

गढ़वाल-कुमाऊं में रंगमंच के 100 साल पूरे होने पर दिल्ली में प्रवासी उत्तराखंडियों के संगठन अभिव्यक्ति कार्यशाला की तरफ से श्रीनगर गढ़वाल के चौरास प्रेक्षागृह में गढ़वाल नाट्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है.

पहले दिल्ली में आयोजित किये जाने वाले इस शताब्दी नाट्योत्सव को अब गढ़वाल और कुमाऊं मंडल दोनों में अलग-अलग आयोजित किया जा रहा है. गढ़वाल नाट्य महोत्सव 26 नवम्बर से 28 नवम्बर तक आयोजित किया जाएगा.

उत्तराखंड रंगमंच-शताब्दी नाट्योत्सव जिसे ‘आवाहन 2016-17’ का नाम दिया गया है के तहत आयोजित किए जा रहे गढ़वाल नाट्य महोत्सव में 6 जिलों के 6 नाट्य समूहों के नाटकों की प्रतियोगिताओं के तौर पर प्रस्तुति दी जाएगी और विजेता नाट्य समूह को 21 हजार रुपये का ईनाम दिया जाएगा.

‘आवाहन 2016-17’ के तहत आयोजित किए जाने वाले उत्तराखंड रंगमंच शताब्दी नाट्योत्सव को तीन चरणों में आयोजित किया जा रहा है. प्रथम चरण में गढ़वाल मंडल का नाट्योत्सव श्रीनगर में दूसरे चरण में कुमाऊं मंडल का नाट्योत्सव अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट में और अंतिम चरण दिल्ली में आयोजित किया जाएगा.

तयशुदा कार्यक्रम के तहत शनिवार 26 नवम्बर से सोमवार 28 नवम्बर तक श्रीनगर में आयोजित होने वाले गढ़वाल नाट्य महोत्सव के आयोजन की जिम्मेदारी उत्सव ग्रुप को दी गई है. नाट्योत्सव को लेकर उत्सव ग्रुप से जुड़े लोगों का कहना है कि पहली बार दिल्ली की बजाय इसे उत्तराखंड के दोनों मंडलों में अलग-अलग आयोजित किया जा रहा है.

गढ़वाल नाट्य महोत्सव के गढ़वाल संयोजक प्रो. एसएस रावत और कार्यक्रम के मुख्य कोआर्डिनेटर एवं उत्सव ग्रुप के निदेशक डॉ. राकेश भट्ट ने बताया कि ‘आह्वान 2016-17’ उत्तराखंड के रंगमंच को नई ऊर्जा एवं नई दिशा देने का प्रयास है.

उन्होंने कहा कि ‘अभिव्यक्ति कार्यशाला’ समूह के मुख्य संयोजक मनोज चंदोला एवं उनकी टीम द्वारा उत्तराखंड के रंगमंच के विकास में यह महोत्सव मील का पत्थर साबित होगा.