नोटबंदी का असर : उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन के आए ‘अच्छे दिन’!

500 और 1000 रुपये के नोटबंद होने के बाद जहां आम लोगों और खुदरा करोबारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन (यूपीसीएल) के लिए यह योजना संजीवनी बनकर आयी है. यूपीसीएल की रिकवरी में 10 फीसदी तक का उछाल आया है. दरअसल, उपभोक्ता छूट खत्म होने से पहले 1000 और 500 के नोटों से बिजली के बिल अदा करने में जुटे हैं.

दरअसल, केंद्र सरकार ने घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को अपने बिल जमा करने के लिए बैन करेंसी के इस्तेमाल की छूट दी है. यही वजह है कि यूपीसीएल के कांउटरों पर पुराने नोटों से बिजली का बिल जमा कराने वालों की तादाद में अचानक इजाफा हो गया है.

गौरतलब है कि आगामी 24 नवंबर तक सरकारी अस्पतालों, पेट्रोल पंप और बिजली, पानी सहित कुछेक जरूरी सेवाओं में प्रतिबंधित करेंसी के इस्तेमाल की इजाजत है. कालेधन वालों पर क्या गुजर रही होगी, ये तो वो ही जाने, लेकिन बिजली उपभोक्ता उत्साह के साथ 1000 और 500 के नोटों से बिजली के बिल अदा कर रहे हैं.

सभी जानते हैं कि वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में पावर कॉरपोरेशन सहित अन्य सभी सरकारी महकमों को बिलों की रिकवरी के लिए तकादा करना पड़ता है. लेकिन नोट बंदी से उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन का काम आसान नजर आ रहा है. यूपीसीएल प्रवक्ता का कहना है कि इस बीच 5 से 10 प्रतिशत तक बिल वसूली बढ़ी है.

मतलब बिजली उपभोक्ताओं की मांग है कि बैन करेंसी के इस्तेमाल की मियाद और बढ़नी चाहिए. यूपीसीएल को लगता है कि अगर व्यावसायिक उपभोक्ताओं को भी 1000 और 500 के नोट के इस्तेमाल की छूट मिल जाए तो रिकवरी और बढ़ जाएगी.