‘बागियों’ से लोहा लेने के लिए ‘हरदा’ के बेटे आनंद ने संभाली कमान

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उनकी सरकार को संकट में डालने वाले बागियों को हराने की हुंकार भरी है. पिता की इस हुंकार को अब सियासी हकीकत में बदलने के लिए बेटे आनंद रावत ने सियासी मोर्चाबंदी शुरू कर दी है.

‘ऑपरेशन बागी’ के तहत कांग्रेस ने पहली सर्जिकल स्ट्राइक कुमाऊं की चार सीटों जसपुर, सितारगंज, सोमेश्वर और रामनगर में की है. सरकार और संगठन को चेहरा बनाकर पर्दे के पीछे आनंद रावत ही सियासी व्यूह रच रहे हैं.

बागी होकर बीजेपी में शामिल होने वाले नेताओं के वोट बैंक को खिसकाने के लिए सरकारी योजनाओं का सहारा लिया जा रहा है. भवन व अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के कैंप लगाकर साइकिल, टूल किट से लेकर छात्रवृत्तियां बांटी जा रही हैं.

हरीश रावत ने उनकी सरकार से बगावत करने वाले सितारगंज विधायक पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, जसपुर विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल, रामनगर विधायक अमृता रावत, सोमेश्वर विधायक रेखा आर्य, रुद्रप्रयाग विधायक हरक सिंह, खानपुर (हरिद्वार) विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन, रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा, केदारनाथ विधायक शैला रानी रावत, रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ, नरेंद्र नगर विधायक सुबोध उनियाल को हर हाल में हराने की घोषणा की थी. मुख्यमंत्री की सियासी टीम ने पहले इन सीटों के वोट बैंक समीकरण पर होमवर्क किया.

अब हरदा के बेटे आनंद रावत ने इसके लिए रणनीति तैयार कर काम भी शुरू कर दिया है. दस विधानसभा क्षेत्रों से मैदानी समीकरणों वाली सात सीटें हैं, जबकि पहाड़ की तीन सीटें हैं. मैदानी विधानसभा क्षेत्रों में गरीब तबके और श्रमिक वोट बैंक की खासी तादाद के लिए भवन व अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड का सहारा लिया जा रहा है. सरकार अकेले जसपुर में बोर्ड के चार कैंप लगाकर कई साइकिल और टूल किट बांट चुकी है.

एक कैंप के दौरान तो पूर्व विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल और आनंद रावत के आमने-सामने होने की चर्चा भी रही. सितारगंज में भी सरकार लगातार कैंप लगा रही है, जिसका प्रचार भी सरकार जोर-शोर से कर रही है. साइकिलों की जमकर खरीद हो रही है. सूत्रों के अनुसार बोर्ड के पास इस योजना के लिए लगभग 250 करोड़ का बजट है, जिसमें अभी 54 करोड़ खर्च हुए हैं. वोट बैंक में सेंधमारी के साथ बतौर प्रत्याशी बीजेपी के बागियों और नए चेहरों की तलाश हो रही है.

श्रमिकों को लुभाने के लिए बोर्ड के पास कई ऐसी योजनाएं हैं, जिन पर कांग्रेस निर्भर कर रही है. दो बच्चों को पढ़ाई के लिए छात्रवृति बांटने के साथ दो बेटियों के विवाह के लिए 51-51 हजार रुपये बांटे जा रहे हैं. इतना ही नहीं मुख्यमंत्री इस बात का वादा भी कर चुके हैं कि कांग्रेस के चुनाव जीतने पर इस योजना के तहत श्रमिकों को शौचालय बनाने के लिए बीस हजार और भवन निर्माण तक के लिए वित्तीय मदद का प्रावधान किया जाएगा.

पहाड़ी सीटों सोमेश्वर और केदारनाथ पर सरकार अपनी तीर्थाटन की योजनाओं को भुनाने का योजना बना रही है. केदारनाथ और सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र में ‘मेरे बुजुर्ग मेरे तीर्थ’ योजना के तहत कई लाभार्थियों को ले जाया गया है. सोमेश्वर में तीर्थाटन का अलग प्लान भी मुख्यमंत्री घोषित कर चुके हैं. वहीं केदारनाथ में पुनर्निर्माण के साथ स्थानीय पुरोहितों के लिए कल्याण योजनाओं का सहारा लिया जा रहा है.