’50 दिन भूल जाएं, नोटबंदी की मुश्किलों से पार पाने में लगेंगे 6 महीने’

नोटबंदी के बाद देशभर में लोग एटीएम और बैंकों की लाइनों में लगने को मजबूर हैं. विपक्ष ने भी सड़क से लेकर संसद तक सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है. सरकार का कहना है कि जल्द ही लोगों को परेशानियों से मुक्ति मिल जाएगी. सरकार ने नोटबंदी के साथ ही इसके लिए 50 दिन का समय मांगा था. लेकिन अब एक अंदाजा यह सामने आ रहा है कि इस परेशानी से बाहर आने में 50 दिन नहीं बल्कि 6 महीने लगेंगे.

सरकार के दावों को प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने खारिज कर दिया है. पार्टी ने कहा है कि सरकार और प्रधानमंत्री का 50 दिन में नोटबंदी की मुश्किलों से राहत दिलाने का भरोसा जनता को झांसा है. क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक की खुद की रिपोर्ट के हिसाब से जितने नोटों को बंद किया गया है, उसे छापने में कम से कम 6 से लेकर 9 महीने लगेंगे. कांग्रेस के अनुसार इस हकीकत से जुड़े सवालों का संसद में उत्तर देने से बचने के लिए प्रधानमंत्री सदन की बहस में नहीं आ रहे हैं और जनता को झांसा दे रहे हैं.

कांग्रेस ने नोटबंदी पर अपने जुटाए आंकड़ों के आधार पर सरकार पर वार करने के लिए वरिष्ठ पार्टी नेता और वकील कपिल सिब्बल को मैदान में उतार दिया है. सिब्बल ने पार्टी की ब्रीफिंग के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्हें उस दिन की याद दिलाई जब संसद को लोकतंत्र का मंदिर मानते हुए पीएम ने उसके दरवाजे पर माथा झुकाया था. उन्होंने कहा कि पीएम अपनी इस भावना के साथ लोकतंत्र की मर्यादा को भी भूल रहे हैं. तभी संसद के दोनों सदनों में बहस से खुद की दूरी बना रहे हैं.

सिब्बल ने कहा कि सरकार हर दूसरे दिन नोटबंदी से जनता को हो रही दिक्कतों का हल निकालने का समय बढ़ाती जा रही है. पहले तीन दिन फिर एक हफ्ते और अब 50 दिन में लोगों को पैसे मिलने की दिक्कत दूर होने की बात हो रही है. जबकि रिजर्व बैंक की बीते 21 नवंबर के जारी डाटा के हिसाब से 500 और 1000 रुपये के 2203 करोड़ नोट प्रचलन में थे.

आरबीआई की यही रिपोर्ट कहती है कि सालाना वह 2300 करोड़ नोट ही प्रिंट कर सकती है. सिब्बल ने कहा इस लिहाज से 15 लाख करोड़ रुपये के प्रचलित नोटों के बदले नए नोट छापने में 9 महीने तक लग सकते हैं. सरकार और रिजर्व बैंक पूरी क्षमता भी लगा दे तो कम से कम 6 माह नोट छापने में लगेंगे. ऐसे में सरकार का 50 दिन में हालात सुधारने का दावा गलत है.

कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार ने नोटबंदी को लेकर तैयारी नहीं की थी, इसका अंदाजा अफरा-तफरी में छपे 500 रुपये के दो किस्म के नोटों से जाहिर है. उन्होंने यह भी दावा किया कि देश की 80 करोड़ जनता की आय 10 हजार रुपये महीने से कम है और इसमें से अधिकांश नगद लेन-देन करते हैं और यह कालाधन नहीं है. लेकिन सरकार ने आज ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि इन सभी की मेहनत की कमाई कालाधन मानी जा रही है.

सिब्बल ने कहा कि नोटबंदी की वजह से आज डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है और असंगठित क्षेत्र में लाखों लोगों के सामने बेरोजगारी की स्थितियां बन रही हैं.