जानिए कैसे नष्ठ होंगे बैंकों में जमा हुए 2300 करोड़ के पुराने नोट?

31 मार्च, 2016 तक देश की अर्थव्यवस्था में 500 और 1000 रुपये के नोटों की कुल कीमत 14.95 लाख करोड़ रुपये थी। यानी, जितनी नकदी सर्कुलेशन में है, उसका 86 फीसदी। सैद्धांतिक तौर पर देखें तो अब यह सारा पैसा बैंकों, डाकघरों के जरिए वास्तविक और आधिकारिक अर्थव्यवस्था में आ जाएगा।

करीब 6 लाख करोड़ रुपये तो बैंकों में जमा करवाए भी जा चुके हैं। लेकिन एक सवाल जो सबके जहन में है कि आखिरकार इन नोटों का होगा क्या?

500, 1000 रुपये के 23 बिलियन (2300 करोड़ रुपये) जो अब चलन से बाहर हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, इन्हें अगर एक साथ लाया जाए, तो यह माउंट एवरेस्ट से 300 गुना ऊंचा ढेर बन जाएगा।इन नोटो को फाइलें, कैलेंडर्स आदि बनाने के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है। साथ ही, जो नोट तय मानक के हिसाब से सही-सलामत अवस्था में हैं, उन्हें नई करंसी में बदलने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सालाना 2,700 करोड़ रुपये करंसी निर्माण में खर्च करता है। 98% ‘कन्ज्यूमर पेमेंट’ भारत में कैश द्वारा किए जाते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘लगभग पूरी तैयारी कर ली गई है। करंसी को पतले-पतले टुकड़ों में काटा जाएगा और फिर उनका उपयोग किया जाएगा। इन नोटों को इस तरह काटा जाएगा कि टुकड़ों को फिर से जोड़कर नोट न बनाए जा सकें। फिर इन टुकड़ों को एक ह्यूमिडिफायर में डाला जाएगा, जो इन्हें ब्रिकेट्स यानी ईंट जैसे टुकड़ों में बदल देंगे। इन टुकड़ों को कॉन्ट्रैक्टर्स को दिया जाएगा, जो मुख्य तौर पर इनका उपयोग गड्ढे भरने में करते हैं।’