‘कालेधन पर रोक लगाने के लिए नहीं, कालाधन पैदा करने के लिए की गई नोटबंदी’

नोटबंदी पर हमला जारी रखते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने की जो घोषणा की, उसका मकसद कालाधन पर रोक लगाना नहीं, बल्कि ‘कालाधन पैदा करना’ था.

आम आदमी पार्टी (आप) के नेता ने केंद्र सरकार के आठ नवंबर के नोटबंदी के फैसले को ‘आठ लाख करोड़ का सबसे बड़ा घोटाला’ करार दिया.

केजरीवाल ने अपने फेसबुक पेज पर लाइव वीडियो चैट में कहा है, ‘मोदीजी कालाधन पर रोक लगाने को लेकर गंभीर नहीं हैं. उनका इरादा ठीक नहीं है. यह निर्णय कालाधन पैदा करने के लिए है.’

आप के राष्ट्रीय संयोजक ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय स्टेट बैंक ने नोटबंदी की घोषणा के बाद 63 पूंजीपतियों के 6000 करोड़ रुपये के कर्ज माफ कर दिए.

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि इन पूंजीपतियों में विजय माल्या भी एक है, जिसका करीब 1200 करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया गया है, जबकि माल्या भगोड़ा घोषित हो चुका है.

केजरीवाल ने कहा कि इन पूंजीपतियों द्वारा संचालित कॉरपोरेट घरानों को आठ लाख करोड़ रुपये का कर्ज स्वीकृत किया गया है. उन्होंने आरोप लगया कि इन कॉरपोरेट घरानों ने इस पैसे का गबन कर लिया या उनके हिस्सा बैंकों ने बट्टे खाते में डाल दिया.

केजरीवाल ने कहा, यह नोटबंदी एक बड़ी साजिश है. सरकार लोगों द्वारा बंद किए गए नोट जमा किए जाने से 10-11 लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद कर रही है और कर्ज को बट्टा खाता में डाले जाने की उम्मीद कर रही है. इसी से मोदी सरकार का मकसद समझा जा सकता है.

केजरीवाल के आरोपों पर केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट करके केजरीवाल की खिल्ली भी उड़ाई है.