केदारनाथ आपदा में दबे शवों का पता लगाने के लिए बने SIT: हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शनिवार को राज्य सरकार से कहा कि वह पांच विशेष जांच टीमें (एसआईटी) बनाए और फिर से एक तलाशी अभियान चलाए ताकि पता चल सके कि 2013 में अचानक आई भीषण बाढ़ के दौरान प्रभावित इलाकों में कोई और शव तो दबा नहीं है. कोर्ट का आदेश इसलिए अहम है क्योंकि केदार घाटी में नरकंकालों के मिलने का सिलसिला अब भी जारी है.

न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रैंक के अधिकारियों की अध्यक्षता में पांच एसआईटी का गठन करना चाहिए ताकि बाढ़ प्रभावित विभिन्न इलाकों में शवों का पता लगाया जा सके.

आदेश में कहा गया कि एसआईटी में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), पुलिस और अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों और जवानों को शामिल किया जाए. कोर्ट ने यह आदेश भी दिया कि बरामद होने वाले शवों का अंतिम-संस्कार उनके धर्म के अनुसार किया जाए.

आदेश के मुताबिक, ‘शवों का पता लगाने के बाद राज्य सरकार उनके डीएनए प्रोफाइल तैयार करेगी और मृतकों के परिजन को सूचित करेगी. सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद राज्य सरकार हिंदू, सिख, ईसाई और मुस्लिम धर्म के अनुसार अंतिम-संस्कार करेगी.’

दिल्ली के रहने वाले आचार्य अजय गौतम की ओर से दाखिल एक जनहित याचिका पर कोर्ट ने यह आदेश पारित किया है. गौतम ने दलील दी थी कि भीषण बाढ़ के बाद करीब 3500 लोगों के लापता हो जाने की बात राज्य सरकार द्वारा स्वीकार करने के बावजूद अब तक सिर्फ 450 शवों का पता लगाया जा सका है. इसका मतलब है कि प्रभावित इलाकों में और शव या नरकंकाल दबे हुए हैं.