सरकार अब इस तरह के उपयोग में लगाएगी पुराने 500, 1000 के नोटों को….

भारत सरकार की ओर से नोटबंदी के ऐलान के बाद तमाम लोग तो अपनी कमाई और बचत के 500 और 1000 के पुराने नोट बदलवाने की जुगत में लगे हैं. वहीं सबके जेहन में यह सवाल भी उभर रहे हैं कि चलन से बाहर किए गए पुराने नोटों को जमा कर सरकार उसका क्या करेगी? इन पुराने नोटों को निपटाने का काम भारतीय रिजर्व बैंक करती है.

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक मार्च 2016 में देश में 15,707 मिलियन 500 रुपए के नोट प्रचलन में थे. साथ ही 1000 रुपए के नोटों की संख्या 6,326 मिलियन थी. दुनिया भर में केंद्रीय बैंक अलग-अलग तरीकों से प्रचलन से बाहर हुए नोटों का निपटारा करता है.

आइए जानते हैं जिसके जरिए इन नोटों को ठिकाने लगाया जाता है.

1. इन अमान्य पुराने नोटों को बड़े पैमाने पर इकट्ठा करने के बाद आरबीआई इसे नियम के मुताबिक इन्हें नष्ट करने की तैयारी में जुटेगा. बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक वह पूरी तरह से तैयार हैं. उन्होंने बताया कि इन पुराने नोटों की श्रेडिंग (चूर-चूर करना) की जाती है.

2. अधिकारी के मुताबिक ऐसे अमान्य नोटों को रिसाइकल नहीं किया जा सकता है. श्रेडिंग के बाद इन नोटों को पिघलाकर कोयले की ईंटें तैयार की जा सकती है.

3. तैयार की कोयले की ईंटों को टेंडर निकाल कर कॉन्ट्रैक्टर्स को दे दिया जाता है. वे लोग इसका इस्तेमाल लैंड फिलिंग यानी सड़कों के गड्ढे वगैरह भरने में करते हैं.

4. कुछ देशों में पुराने और अमान्य नोटों को जलाकर सरकारी इमारतों को गर्म करने का काम भी किया जाता है. साल 1990 तक बैंक ऑफ इंगलैंड इसी तरीके को अपनाता रहा था.

5. जैविक उत्पादों से बने पुराने नोटों को निपटाने के लिए कुछ देश इसका कंपोस्ट (खाद) बना लेते हैं. साल 2000 के बाद से बैंक ऑफ इंगलैंड ने ऐसे नोटों को नष्ट करने के बाद खाद बनाने का काम शुरू कर दिया है. मिट्टी की उर्वरकता बढ़ाने के लिए इसे खेतों में डाला जाता है.