पहली बार दुनिया के पर्वतीय देशों के विश्व एजेंडे में शामिल होगा हिमालय

भारत के पेरिस सम्मेलन में दुनिया को क्लाइमेट जस्टिस और रेड प्लस सरीखी अवधारणा देने के बाद पर्वतीय देशों ने हिमालय को तवज्जो दी है. जहा हिमालय पहली बार पर्वतीय देशों के विश्व एजेंडे में शामिल होने जा रहा है.

विश्व पटल पर पीएम नरेंद्र मोदी की पैरवी के बाद हिमालय को अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में शामिल किया जा रहा है. मोरक्को में आयोजित सीओपी-22 में बृहस्पतिवार को जीबी पंत इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन एनवायरनमेंट एंड डेवलपमेंट की टीम पर्वतीय देशों के समक्ष हिमालय की अहमियत और जलवायु परिवर्तन का ब्योरा प्रस्तुत करेगी.

विश्व के 98 पर्वतीय देशों के समूह में अभी तक हिमालय को शामिल नहीं किया गया था. इसकी वजह से जलवायु परिवर्तन के क्षेत्रों में काम कर रहीं अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने हिमालयी क्षेत्र में बड़े विकास कार्यक्रम शुरू करने में दिलचस्पी नहीं ली.

पेरिस सम्मेलन के बाद भारत जलवायु परिवर्तन की मुहिम का ‘अगुवा’ के रूप में उभरा है. इसके साथ ही हिमालय की पैरवी भी की गई. इससे हिमालय को अंतरराष्ट्रीय एजेंडा में शामिल किया जा रहा है. अब विश्व भर के विज्ञानी हिमालय पर शोध के लिए आएंगे.

मोरक्को में सात से 18 नवंबर तक आयोजित 197 देशों की कान्फ्रेंस ऑफ पार्टीज-22 में 17 नवंबर को जीबी पंत इंस्टीट्यूट की टीम निदेशक डॉ. पीपी ध्यानी की अगुवाई में हिमालयी ब्योरा प्रस्तुत करेगी.

केंद्र सरकार ने इस संबंध में जीबी पंत इंस्टीट्यूट को नोडल की जिम्मेदारी है. इसके पहले मोरक्को सीओपी-22 में केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिवों की टीम विभिन्न मुद्दों पर पर्वतीय देशों के साथ प्रावधानों और नीतियों पर विचार-विमर्श कर चुकी है.

हिमालय अब अंतरराष्ट्रीय एजेंडा में आएगा. इससे जलवायु परिवर्तन की दिशा में विश्व का सहयोग बढ़ेगा. अभी तक हिमालय इस एजेंडा में शामिल नहीं था. हिमालय विश्व का सबसे यंग पहाड़ होने की वजह से बहुत अहम है.