हल्द्वानी : मुख्यमंत्री ने 24 करोड़ की 9 योजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया

नैनीताल जिले के हल्द्वानी में मेडिकल कॉलेज परिसर में मंगलवार को भव्य समारोह में वैदिक मंत्रों के बीच मुख्यमंत्री हरीश रावत ने डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार एवं चिकित्सकीय सेवाओं के बेहतरी के लिए लगभग 24 करोड की 9 योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया. इस मौके पर उनके साथ वित्त मंत्री डॉ. इंदिरा हृदयेश, चिकित्सा शिक्षा मंत्री दिनेश धनै, श्रम मंत्री हरीश चन्द्र दुर्गापाल, अध्यक्ष जिला पंचायत सुमित्रा प्रसाद द्वारा मेडिकल कॉलेज डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय भी मौजूद थे.

मेडिकल कॉलेज में 774.08 लाख की लागत से निर्मित केन्द्रीय पुस्तकालय भवन, 151 लाख की लागत से निर्मित नर्सिंग कॉलेज तथा 73.60 लाख की लागत से निर्मित नर्सिंग छात्रावास भवन का लोकार्पण किया गया. इसी कड़ी में डॉ सुशीला तिवारी चिकित्सालय मे 751 लाख लागत से निर्मित होने वाले ट्रॉमा सेन्टर, 650 लाख की लागत से निर्मित होने वाले बर्न यूनिट तथा 36 लाख की लागत से होने वाले अस्वस्थ नवजात शिशु उपचार ईकाई (एसएनसीयू) का शिलान्यास किया गया.

इसके साथ ही चिकित्सालय में विकास विभाग की ओर से संचालित इन्दिरा अम्मा भोजनालय का शुभारम्भ भी किया गयाय कार्यक्रम में रेडक्रॉस की ओर से संचालित 50 शयाओं वाले रैनबसेरा तथा प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र का शुभारम्भ किया गया. साथ ही कुमायूं क्षेत्र की पर्यटन एवं संस्कृति से सम्बन्धित 10 योजनाओं का लोकापर्ण एवं शिलान्यास किया.

इस अवसर पर आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा, आयुर्वेदिक, नर्सिंग और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में राज्य बहुत अच्छी स्थिति में है. इस क्षेत्र में गुणात्मक सुधार हेतु दृढ़ प्रयास किए जा रहे हैं. राज्य में 5 नए नर्सिंग कॉलेज भी शीघ्र ही स्थापित किए जा रहे हैं. उन्होनें कहा कि राज्य की सभी नदियों के विकास के लिए नदी विकास प्राधिकरण का गठन कर दिया गया है. पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय धीरे-धीरे अपने पुराने गौरव को प्राप्त कर रहा है. दून मेडिकल कॉलेज प्रारम्भ हो चुका है, अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज अगले साल तक शिक्षण प्रारम्भ कर देगा. पिथौरागढ़, भगवानपुर, कोटद्वार व रुद्रपुर के लिए प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृतियां इस साल जारी कर दी जाएंगी.

मुख्यमंत्री ने कहा, हमने दो महत्वाकांक्षी योजनाएं लागू की हैं. पहली राज्य खाद्यय सुरक्षा योजना जिसके तहत हम एपीएल कार्ड धारकों को भी सस्ता अनाज मुहैया कराने में लगभग 300 करोड़ रुपया अतिरिक्त खर्च कर रहे हैं. सस्ता गल्ला विक्रेताओं के देय कमीशन को पुर्नरक्षित करने के मैंने आदेश दिए हैं. दूसरी योजना मुख्यमंत्री स्वास्थ बीमा योजना जिसका हमने इस साल दायरा बढ़ाकर 1,75,000 रुपया कर दिया है.

उन्होंने कहा इस साल हम चार डाईलेसीस सेन्टर भी स्थापित कर देंगे. डॉक्टरों का अभाव अत्यधिक कष्टकारक है, हमने उनकी मांगों को उदारतापूर्वक स्वीकार किया है, अब उनसे सहयोग की अपेक्षा है. दूर-दराज के क्षेत्रों में सर्जिकल एवं डायग्नोस्टिक कैम्पस व मेडिकल वैन सर्विस के माध्यम से हम हर सम्भव स्वास्थ सेवाएं पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं. हम इस व्यवस्था के साथ हैली सर्विसेज को भी जोडेंगे. बी.डी.एस. व आयुर्वेदिक डॉक्टरों तथा फार्मेसिस्टों को भर्ती कर हम स्वास्थ सेवाओं में आ रहे अभाव को कम करने का प्रयास कर रहे हैं. हमने इस दिशा में सुधार हेतु लगभग 75 नए एएनएम सेन्टर भी स्वीकृत किए हैं तथा दाई सेवाओं को सुधारने का प्रयास किया है.

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वास्थ बीमा योजना का द्वितीय चरण 1 अगस्त से प्रारम्भ किया, अब सामान्य रोगों के लिए 50 हजार रुपये तथा गम्भीर रोगों के इलाज हेतु 1.75 लाख तक की नकद रहित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है. उन्होंने बताया कि जनसामान्य को सुपर स्पेशलिस्ट सेवाएं प्रदान किए जाने हेतु दून अस्पताल तथा बेस अस्पताल हल्द्वानी में 5-5 सुपर स्पेशलिस्ट के पदों का सृजन किया गया. विभिन्न डिलों में 23 चिकित्सा इकाईयों का उच्चीकरण करने के साथ ही बेस चिकित्सालय अल्मोड़ा में कार्डियक केयर सेन्टर की सुविधा प्रारम्भ किया जाएगा.

मुख्यमंत्री ने कहा डॉक्टरों की कमी को अतिशीघ्र दूर करने के लिए वॉक इन इंटरव्यू प्रणाली को प्रारम्भ किया जाएगा. राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों को 20 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता तथा वेतन दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि ग्रामीण, दुर्गम, अतिदुर्गम असेवित क्षेत्रों में 539 स्वास्थ उप केन्द्रों पर फार्मेसिस्टों की तैनाती की. उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य है. डॉक्टरों के लिए स्थानान्तरण नीति घोषित की, जिसके लागू होने से डॉक्टरों को दुर्गम क्षेत्रों में न्यूनतम 02 वर्ष तक सेवाएं देना अनिवार्य होगा. उन्होंने बताया कि 108 आपातकालीन सेवा को अत्यधिक पारदर्शी बनाने के लिये सभी वाहनों पर जीपीआरएस प्रणाली स्थापित की जा रही है, ताकि वाहनों का यथासमय एवं उपयुक्त स्तर पर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके.