500-1000 के नोट बंद होने से औंधे मुंह गिरे फलों-सब्जियों के दाम, नहीं मिल रहे खरीददार

थोक बाजार हो या खुदरा बाजार 500 और 100 के नोट बंद होने से सभी जगह पर इसका असर देखने को मिल रहा है. अस्थायी राजधानी देहरादून की मंडी में सब्जियां पड़े-पड़े खराब हो रही हैं. क्योंकि क्षेत्रिय बाजारों के दुकानदार छोटी करंसी न होने से खरीदारी नहीं कर पा रहे हैं. बिक्री न होने से आड़तियों ने भी माल नहीं मंगाया और मंडी में आवक घटकर आधी हो गई. सब्जियों-फलों के दाम औंधे मुंह गिर गए हैं.

देहरादून की मंडी समिति निरंजनपुर में आड़तियों की दुकानों में सब्जियां भरी पड़ी हैं. 8 नवम्बर को मंडी में 7 हज़ार 107 क्विंटल सब्जी और फल की आवक हुई थी. लेकिन रात को 500 और 100 के नोट बंद होने से अगले दिन बुधवार को मंडी में फल और सब्जियों की आवक घटकर 6 हज़ार 280 क्विंटल हो गई थी.

जोकि दूसरे दिन यानी गुरुवार को मंडी में आवक घटकर आधी यानी 3 हज़ार 651 क्विंटल ही रह गई. मंडी समिति निरंजनपुर के आड़तियों का कहना है, रुटीन का सब्जी और फलों का ज्यादातर कारोबार कैश में ही होता है. लेकिन लोग 500 और 1000 का नोट ला रहे हैं, जोकि चलन से बाहर हैं, तो फिर कैसे माल दिया जाए.

थोक मंडी में मूली, शलज़म, पालक, शिमला मिर्च, गोभी, हरि मिर्च, धनिया, लौकी, प्याज़, आलू सहित तमाम तरह की सब्जियां भरी पड़ी हैं. लेकिन ज्यादा नुकसान हरी सब्जियों के खराब होने से हो रहा है. तीन दिन पहले तक सौ से डेढ़ सौ रुपये किलो के हिसाब से बिकने वाला हरा धनिया गुरुवार को 10 रुपये किलो में भी पूरा नहीं बिक पाया. क्योंकि मंडी से सब्जियां लाने वाले दुकानदार 1000 और 500 के नोट ला रहे हैं. जिन्हे आड़ती लेने से मना कर रहे हैं. यही हाल फलों और दूसरे सामान का भी हो रहा है. आड़तियों की दुकानों पर सामान की बोरियां भरी पड़ी हैं. हालांकि आड़तियों को यह भी उम्मीद है कि जल्दी ही हालात ठीक हो जाएंगे.

कालेधन और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए 500 और 1000 के नोट को बंद करने के फैसले को लोग सही तो बता रहे हैं, लेकिन साथ ही कहते हैं कि छोटे नोट ज्यादा होने से दिक्कत हो रही है. लोगों को इंतेज़ार है कि जल्दी ही पर्याप्त मात्रा में नए नोट लोगों को मिलते ही कारोबार भी पटरी पर लौट आएगा.