राज्य स्थापना दिवस पर शुरू हुए उत्तराखंड रत्न पुरस्कार, पहले रत्नों में एनडी तिवारी का भी नाम

उत्तराखंड राज्य स्थापना की 16वीं वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पहली बार उत्तराखंड रत्न पुरस्कारों की शुरुआत की. इसके साथ ही मुख्यमंत्री की ओर से सूचना विभाग की पुस्तिका ‘उत्तराखंड- जन जन के संग’, विकास पुस्तिका का विमोचन किया गया.

अस्थायी राजधानी देहरादून के न्यू कैंट रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में सीएम हरीश रावत ने राज्य के कला, संस्कृति और खेल के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने वालों को भी सम्मानित किया. 17वें स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री ने शहीदों के सपनों को साकार करने के लिए सबको सहयोग देने की अपील की.

राज्य स्थापना दिवस पर उत्तराखंड सरकार ने पहली बार उत्तराखंड रत्न पुरस्कार की शुरुआत की जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली, श्रीदेव सुमन, उत्तराखंड के गांधी इंद्रमणि बड़ोनी, जयानंद भारती, गौरा देवी, बद्रीदत्त पांडेय, मंगला माता, महंत घनश्याम गिरी को पहले उत्तराखंड रत्न सम्मान से नवाजा गया.

खेलों में महत्वपूर्ण योगदान के लिए सुरेंद्र सिंह रावत को द्रोणाचार्य अवार्ड दिया गया. वहीं, हॉकी खिलाड़ी रहे राजेंद्र सिंह रावत को लाइफ टाइम अचीवमेंट सामान से सम्मानित किया गया. एथलीट गुरमीत को खेल रत्न पुरस्कार से नवाजा गया. रियो ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को भी इस मौके पर सम्मानित किया गया. उत्तराखंड से 4 खिलाड़ी रियो ओलंपिक में शामिल हुए थे.

मनीष रावत को राज्य सरकार पहले ही सम्मानित कर चुकी है. उनके अलावा बाकी तीनों खिलाड़ियों को इस दौरान सम्मान से नवाजा गया. वहीं, लोककला के क्षेत्र में कबूतरी देवी को लाइफ टाइम अचीवमेन्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया. जबकि लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी को गोपाल बाबु गोस्वामी स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया.

उर्वशी रौतेला और पार्थ मेहता को बृजमोहन शाह स्मृति सम्मान दिया गया. केशव दास अनुरागी स्मृति सम्मान से उत्तम दास को नवाजा गया. लवरेज सिंह को साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में सम्मान मिला. साथ ही योग के जरिए ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने वाले चन्द्र मोहन सिंह भंडारी को भी सम्मानित किया गया.

कार्यक्रम में कई ऐसी विभूतियों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने अपने क्षेत्र में बेहतरीन कार्य किए हैं. देहरादून की ग्रामसभाओं में बेहतरीन काम करने वालो को भी ग्रामश्री पुरस्कार से नवाजा गया.