सांप, बाघ, गुलदार जैसे जंगली जानवरों ने नुकसान पहुंचाया तो मिलेगा दोगुना मुआवजा

उत्तराखंड में वन्यजीवों के हमले में जनहानि या पशुहानि होने पर अब दोगुना मुआवजा दिया जाएगा, जबकि सर्पदंश से होने वाले मृत्यु को भी अनुग्रह राशि की सूची में शामिल कर लिया गया है.

मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में सोमवार को अस्थायी राजधानी देहरादून में हुई उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में निर्णय लिया गया कि वन्यजीवों के हमलों में किसी मनुष्य की मृत्यु होने पर अब तीन लाख रुपये की जगह छह लाख रुपये दिए जाएंगे. इसी प्रकार,वन्यजीव हमलों में गंभीर रूप से घायलों को पचास हजार रुपये के स्थान पर अब एक लाख रुपये, अपंग होने की दशा में दो लाख रुपये की जगह पर चार लाख रुपये दिए जाएंगे.

देहरादून में जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, वन्यजीवों के हमलों में गाय और घोड़े की क्षति होने पर क्रमश: 30 हजार तथा 80 हजार रुपये अनुग्रह राशि देने का निर्णय किया गया है.

कृषि क्षति पर गन्ने के लिये अब प्रति एकड़ 50 हजार रुपये, धान, गेहूं, तिलहन के लिए 30 हजार रुपये प्रति एकड़ तथा अन्य फसलों के लिए 16 हजार रुपये प्रति एकड़ उपलब्ध कराए जाएंगे.

इसी प्रकार मकान की क्षति पर, कच्चे मकान के लिए 50 हजार रुपये तथा पक्के मकान के लिए एक लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का निर्णय लिया गया है.

उत्तराखंड के 65 प्रतिशत भूभाग पर जंगल होने और आबादी जंगलों के निकट बसे होने के कारण यहां बाघ ,तेंदुआ और भालू जैसे वन्यजीवों और मानवों के बीच संघर्ष की घटनाएं आये दिन सामने आती हैं, जिनमें जनहानि भी होती है.

बोर्ड की बैठक में मुख्यमंत्री रावत ने जंगल से जुड़े गांवों के लिये सामूहिक बीमा योजना संचालित किए जाने के भी निर्देश दिए. उन्होंने वन गूजरों के विस्थापन में भी तेजी लाने, जंगलों में वन्यजीवों के भोजन की व्यवस्था हेतु वनों में रिंगाल, बांस व फसलों के बीजों के रोपण पर भी ध्यान देने को कहा.

बैठक में वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के गठन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई इस ब्यूरो में पुलिस विभाग से कार्मिकों को प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया जाएगा.