यूओयू के प्रथम दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन | राज्यपाल ने किया होनहारों को पुरुस्कृत

 उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय का प्रथम दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया गया। जिसमे कुलाधिपति एवं राज्यपाल डा0 कृष्ण कान्त पाल ने सत्र 2014-15 के 20 स्वर्ण पदक सहित 5197 छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान की।
दीक्षांत समारोह का शुभारम्भ कुलाधिपति डा0 पाॅल, उच्चशिक्षा मंत्री डा0 श्रीमती इन्दिरा हृदयेश तथा कुलपति प्रो नागेश्वर राव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

 

इस अवसर पर अपने सम्बोधन में डा0 पाॅल ने कहा कि जीवन में शिक्षा एक अन्तहीन यात्रा के समान है।जो जीवन परियन्त चलती है। उमंग, उत्साह और ऊर्जा के सोत्रो से हमेशा जुडे रहिए चाहे वे व्यक्ति विशेष के रूप मे हो या पुस्तको के रूप में। अच्छी पुस्तकों को सकारात्मक सोच के साथ पढने की आदत बनानी चाहिए। अच्छी पुस्तके ज्ञान में वृद्धि के साथ ही व्यक्गित एवं सामाजिक जीवन की समृद्धि मे सहायक होती है।
 डा0 पाॅल ने कहा कि यदि हमंे ग्रास इन्रोैलमैन्ट अनुपात के 30 प्रतिशत के राष्टीय लक्ष्य तक पहुचना है तो हमे मुक्त एवं दुरस्थ शिक्षा को बढावा देना होगा। यहां ना उमर का बन्धन है ना ही स्थान का यह एक लचीली शिक्षण पद्धति है। उन्होने खुशी जाहिर करते हुये कहा कि 2005 में स्थापित इस विश्वविद्यालय ने 2774 छात्रों से शिक्षण की शुरूआत की थी। आज यह छात्र संख्या लगभग 35 हजार तक पहुच गयी है। जो कि शुभ संकेत है। उन्होने कहा कि इस विश्वविद्यालय मे दी जाने वाली शिक्षा रोजगार परक है, लेकिन समय-समय पर आवश्यकता अनुसार पाठ्यक्रमो मे बदलाव भी करना जरूरी हेै। उन्होने कहा कि बेरोजगारी की बढती समस्या को विश्वविद्यालय ध्यान में रख कर रोजगार परक पाठ्यक्रम तैयार करें, ताकि विद्यार्थियों का पलेस्मेंट व स्रोजगार के लिए विभिन्न उद्योगो मे समायोजन हो सके। उन्होने इस अवसर पर सभी उपाधि धारकों को शुभकामनाये देते हुये समाज व राष्ट सेवा में जुडने की बात कही।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि उच्चशिक्षा मंत्री डा0 हृदयेश ने कहा कि उच्चशिक्षा हमारे अन्दर विवेक भरने का जगह देती है।
अब तक प्राप्त शिक्षा, मुल्य, चरित्र व आचरण को किसी प्रकार समाज में लागू करना है यह विवेक पर निर्भर करता है। उन्होने कहा कि उच्चशिक्षा, समाजिक शोध के कुछ निष्र्कष आपको देती है और यही से आपकी जीवन यात्रा प्रारभ होती है। उन्होने कहा कि उच्चशिक्षा का वास्तविक अर्थ उनकी व्यंजना है जिसके अनुसार वह समाज के भविष्य का आलेख तैयार कर सामने प्रस्तुत करती है। इस विश्वविद्यालय के शैक्षणिक गतिविधियो से शुरू से ही जुडाव रहा है। उन्होने कहा कि असकोट से आराकोट तक और जसपुर से पिरानकलीयर तक यह प्रदेश कोने-कोने तक पहुच गया है। डा0 हृदयेश ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा उच्चशिक्षा मे आमूलचूल परिवर्तन किये गये है।
प्रदेशभर में नये महाविद्यालय खोले गये है तथा नये विषयो की स्वीकृत के साथ ही कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि यह विश्वविद्यालय प्रदेशभर में शिक्षा और संस्कारों का संवाहक बने। उन्होने कि पिछले दिनों हल्द्वानी घोषण पत्र के तहत इस विश्वविद्यालय में आईटी एकेडमी खोले जाने की प्रकिया गतिमान है। उन्होने सभी छात्र-छात्राओं को शुभकामनायें दी।
अतिथियों का स्वागत करते हुये विश्वविद्यालय की प्रगति का प्रस्तुतिकरण करते हुये प्रो0 नागेेश्वर राव ने कहा कि मुक्त एवं दुरस्थ शिक्षा के माध्यम से पूरे प्रदेश में उच्चशिक्षा की लौ जगाने में उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय अपने लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध है। प्रगति कि यह यात्रा 11 वर्षो से निरन्तर जारी है। उन्होने कहा कि यह खुशी की बात है कि प्रदेश भर के विद्यार्थियों एवं शिक्षको के लिए एक ई-पोर्टल बनाया गया है। जिसमें 20 से अधिक विषयों की मुद्रित सामग्री एवं वीडियो सामग्री अपलोड हो चुकी है। जिसका फायदा सभी छात्र ले रहे है। हाल ही मे अगस्त माह मंे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वार एम-फील, पीएचडी कार्यक्रमो को पुनः प्रारम्भकरने की अनुमति दी है, जल्दी ही विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी कार्यक्रमों को प्रारम्भ किया जायेगा, साथ ही बीएड स्पेशल, बीएड सामान्य शुरू किये जाने हेतु नियामक संस्थाओ राष्टीय अध्यापक शिक्षा परिषद  एवं भारतीय पुर्नवास परिषद से मान्यता मिल गयी है।
कार्यक्रम का संचालन कुल सचिव प्रो0 आरसी मिश्र द्वारा किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के जिला पंचायत अध्यक्ष सुमित्रा प्रसाद के अलावा विश्वविद्यालय के प्रो0 डीएस पठानिया, प्रो0 वेदप्रकाश शास्त्री, प्रो0 मनोज सिघल, निदेशक प्रो0 गोविन्द सिह विष्ट, प्रो0 एचपी शुक्ल, प्रो0 दुर्गेश पंत, प्रो0 पीडी पंत के अलावा  एचएस धामी, पूर्व कुलपति आर सी पंत, जिलाधिकारी दीपक रावत, एसएसपी जन्मेजय खंडूरी राज्यपाल के परिसहाय डा0 योगेन्द्र सिह रावत सहित बडी संख्या में छात्र-छात्रायें एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे।